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phool aur kaante class 7 hindi | पाठ-3 फूल और काँटा , मल्हार हिंदी सीबीएसई


phool aur kaante class 7 hindi | पाठ-3 फूल और काँटा , मल्हार हिंदी सीबीएसई


phool aur kaante class 7 hindi


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 पाठ 3:  फूल और काँटा 


 ध्वनि प्रस्तुति 



⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

'फूल और काँटा' कविता अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' द्वारा रचित है, जो NCERT कक्षा 7 हिंदी मल्हार पाठ्यपुस्तक का पाठ 3 है। इस कविता का मूल संदेश है — एक ही पौधे पर जन्म लेकर भी फूल और काँटे का स्वभाव अलग होता है। काँटा सबको चुभता और हानि पहुँचाता है, जबकि फूल सबको सुगंध, रस और आनंद देता है। कवि सिखाते हैं कि सम्मान कुल (खानदान) से नहीं, बल्कि गुणों और कर्मों (बड़प्पन) से मिलता है।

कल्पना कीजिए कि दो बीज एक ही मिट्टी में बोए गए, उन्हें एक ही माली ने सींचा और एक ही सूरज की धूप मिली। लेकिन जब वे बड़े हुए, तो एक ने कोमल पंखुड़ियों से खुशबू बिखेरी और दूसरे ने अपने तीखे नुकीलेपन से उंगलियों को लहूलुहान कर दिया। प्रसिद्ध कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की कालजयी कविता 'फूल और काँटा' केवल वनस्पति विज्ञान का पाठ नहीं है, बल्कि यह मानवीय स्वभाव और चरित्र निर्माण की एक गहरी दार्शनिक व्याख्या है।

इस लेख में हम कविता का सम्पूर्ण भावार्थ, शब्दार्थ, प्रतीकात्मक विश्लेषण, NCERT प्रश्न-उत्तर, HOTS प्रश्न, 20 प्रश्नों की क्विज़ और रिवीज़न नोट्स — सब कुछ एक ही स्थान पर पढ़ेंगे। यह गाइड कक्षा 7 के विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों — तीनों के लिए तैयार की गई है।

📑 इस लेख में क्या-क्या है (Table of Contents)

1. कवि परिचय — हरिऔध जी  |  2. कविता का मूल पाठ व भावार्थ  |  3. शब्दार्थ तालिका  |  4. फूल बनाम काँटा — प्रतीक विश्लेषण  |  5. जीवन के 4 बड़े सबक  |  6. NCERT प्रश्न-उत्तर  |  7. HOTS प्रश्न  |  8. व्याकरण बिंदु (विशेषण-विशेष्य, मुहावरे)  |  9. 20 प्रश्नों की MCQ क्विज़  |  10. रिवीज़न नोट्स  |  11. AI सारांश  |  12. FAQ

✍️ कवि परिचय: अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'

अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' हिंदी साहित्य के द्विवेदी युग के प्रमुख कवि थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में हुआ था। उनकी सबसे प्रसिद्ध काव्य-कृति 'प्रियप्रवास' है, जिसे खड़ी बोली हिंदी का पहला महाकाव्य माना जाता है। हरिऔध जी ने बड़ों के साथ-साथ बच्चों के लिए भी सरल और सुंदर कविताएँ लिखीं।

बिंदु विवरण
पूरा नाम अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
जन्म स्थान आजमगढ़, उत्तर प्रदेश
प्रसिद्ध महाकाव्य प्रियप्रवास (खड़ी बोली का पहला महाकाव्य)
बाल-साहित्य संकलन चंद्र-खिलौना, खेल-तमाशा
कविता की शैली सरल खड़ी बोली, तुकान्त, प्रतीकात्मक

👨‍🏫 शिक्षक नोट (Teacher's Note)

कक्षा में इस पाठ को पढ़ाते समय विद्यार्थियों से पहले यह प्रश्न पूछें — "क्या एक ही घर के दो बच्चों का स्वभाव अलग हो सकता है?" इससे कविता का केंद्रीय भाव (समान परिवेश, भिन्न स्वभाव) स्वयं बच्चों के अनुभव से जुड़ जाएगा। 'प्रियप्रवास' और 'खड़ी बोली का पहला महाकाव्य' — यह तथ्य परीक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है।

📖 कविता का भावार्थ — चरण-दर-चरण व्याख्या

चरण 1: समान जन्म, समान पालन-पोषण

"हैं जनम लेते जगह में एक ही, एक ही पौधा उन्हें है पालता।
रात में उन पर चमकता चाँद भी, एक ही-सी चाँदनी है डालता।।"

व्याख्या: कवि कहते हैं कि फूल और काँटा — दोनों एक ही स्थान पर जन्म लेते हैं और एक ही पौधा दोनों का पालन-पोषण करता है। रात में चाँद दोनों पर एक जैसी शीतल चाँदनी बरसाता है। अर्थात प्रकृति किसी के साथ कोई पक्षपात या भेदभाव नहीं करती — जन्म, स्थान और परिवेश दोनों के लिए बिल्कुल समान है।

चरण 2: समान वर्षा-हवा, फिर भी भिन्न 'ढंग'

"मेह उन पर है बरसता एक सा, एक सी उन पर हवाएँ हैं बही।
पर सदा ही यह दिखाता है हमें, ढंग उनके एक से होते नहीं।।"

व्याख्या: दोनों पर एक जैसा मेह (बादल/वर्षा) बरसता है और एक जैसी हवाएँ बहती हैं। फिर भी संसार हमें सदा यही दिखाता है कि दोनों के ढंग — यानी स्वभाव, आचरण और व्यवहार — कभी एक जैसे नहीं होते। यहाँ वर्षा और हवा उन संसाधनों (Resources) के प्रतीक हैं जो समाज में सबको समान रूप से मिलते हैं, परंतु उनका उपयोग हर व्यक्ति अपने स्वभाव के अनुसार करता है।

चरण 3: काँटे का व्यवहार — चुभन और विनाश

व्याख्या: काँटा हर आने वाले की उंगलियों में चुभ जाता है और उन्हें लहूलुहान कर देता है। वह 'वर बसन' (सुंदर, कीमती वस्त्रों) को फाड़ देता है। वह तितलियों के सुंदर पंख कतर देता है और भौंरों के 'श्याम तन' (सांवले, कोमल शरीर) को बेध देता है। अर्थात नकारात्मक स्वभाव वाला व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के हर सुंदर और उपयोगी वस्तु को नुकसान पहुँचाता है।

चरण 4: फूल का व्यवहार — प्रेम और परोपकार

व्याख्या: इसके ठीक विपरीत, फूल तितलियों को अपनी गोद में स्थान देता है, भौंरों को अपना अनूठा रस पिलाकर पोषित करता है और अपनी सुगंध व निराले रंगों से हर कली का जी खिला देता है (मन प्रसन्न कर देता है)। इन्हीं गुणों के कारण फूल 'सुर शीश' — यानी देवताओं के मस्तक — पर सुशोभित होने का गौरव प्राप्त करता है।

चरण 5: कविता का निष्कर्ष — कुल नहीं, बड़प्पन

"किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।।"

व्याख्या: यही कविता का सबसे मार्मिक और केंद्रीय संदेश है — यदि किसी व्यक्ति के स्वभाव में बड़प्पन (सहनशीलता, उदारता, विनम्रता, त्याग) की कमी है, तो केवल ऊँचे कुल (खानदान) में जन्म लेने से उसे सम्मान नहीं मिल सकता। काँटा और फूल एक ही कुल के हैं, फिर भी काँटा सबकी आँखों में खटकता है और फूल देवताओं के सिर पर चढ़ता है — अंतर केवल कर्म और गुणों का है।

🎒 छात्र नोट (Student's Note)

परीक्षा में भावार्थ लिखते समय यह क्रम याद रखें — (1) समान जन्म व पालन, (2) समान चाँदनी-वर्षा-हवा, (3) काँटे का हानिकारक व्यवहार, (4) फूल का परोपकारी व्यवहार, (5) निष्कर्ष: कुल नहीं, बड़प्पन। इसे "5-Step Formula" की तरह रटें — पूरा भावार्थ कभी नहीं भूलेंगे!

📚 शब्दार्थ तालिका (Word Meanings)

शब्द अर्थ
मेहबादल, वर्षा
बसनवस्त्र, कपड़ा
वरश्रेष्ठ, सुंदर
बेध देनाछेद देना, चुभना
श्यामकाला, सांवला
अनूठानिराला, अद्भुत
निजअपना, स्वयं का
सोहनाशोभा देना, सुंदर लगना
सुर शीशदेवताओं का सिर
कुलवंश, परिवार, खानदान
बड़प्पनमहानता, श्रेष्ठता का भाव (सहनशीलता, उदारता, विनम्रता, त्याग)
तुकान्तपंक्तियों के अंत में मिलने वाली समान ध्वनि

🌸 फूल बनाम काँटा — प्रतीक विश्लेषण (Symbolism)

🌸 फूल (सकारात्मक व्यक्तित्व) 🌵 काँटा (नकारात्मक व्यक्तित्व)
परोपकार, प्रेम, विनम्रता और दया का प्रतीक अहंकार, ईर्ष्या, स्वार्थ और द्वेष का प्रतीक
तितलियों को गोद में स्थान देता है तितलियों के सुंदर पंख कतर देता है
भौंरों को अपना अनूठा रस पिलाता है भौंरों के श्याम तन को बेध देता है
सुगंध और रंगों से कली का जी खिलाता है उंगलियों को छेदता है, वर बसन फाड़ता है
परिणाम: देवताओं के शीश पर सुशोभित परिणाम: सबकी आँखों में खटकता है, तिरस्कृत

यह प्रतीकात्मकता हमें बताती है कि कठोरता (काँटा) अक्सर असुरक्षा से पैदा होती है, जबकि कोमलता (फूल) आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास का परिचय है। कवि ने तितलियों और भौंरों जैसे सौंदर्य और परिश्रम के प्रतीकों का चुनाव इसलिए किया, ताकि दिखा सकें कि नकारात्मक व्यक्ति हर सुंदर और उपयोगी चीज़ को समान रूप से हानि पहुँचाता है।

💡 इस कविता से जीवन के 4 बड़े सबक

सबक 1: समान परिस्थितियाँ, भिन्न परिणाम

बाहरी परिस्थितियाँ या सुख-सुविधाएँ हमारे व्यक्तित्व का निर्धारण नहीं करतीं। हमारा 'ढंग' — यानी हमारा आंतरिक स्वभाव और हमारे चुनाव — ही तय करता है कि हम संसाधनों का उपयोग सृजन के लिए करेंगे या विनाश के लिए।

सबक 2: आपके व्यवहार का दूसरों पर प्रभाव

सकारात्मकता केवल स्वयं की शोभा नहीं बढ़ाती, बल्कि पूरे परिवेश को आनंदित और ऊर्जावान करती है। वहीं नकारात्मक व्यक्ति बिना भेदभाव के हर सुंदर वस्तु को हानि पहुँचाता है — जैसे काँटा तितली, भौंरे और वस्त्र, सबको समान रूप से घायल करता है।

सबक 3: सम्मान जन्म से नहीं, कर्म से मिलता है

आपकी डिग्री या पारिवारिक नाम आपको पद दिला सकता है, लेकिन 'सम्मान' केवल चरित्र और कर्मों से अर्जित किया जा सकता है। जिस तरह काँटा अपनी प्रकृति के कारण खटकता है और फूल अपने गुणों से देवताओं के मस्तक पर चढ़ता है।

सबक 4: डिजिटल युग में भी प्रासंगिक

आज जब हम सोशल मीडिया या सार्वजनिक जीवन में दूसरों से संवाद करते हैं, तो हमारा 'ढंग' ही तय करता है कि हम किसी के मन में खुशबू की तरह बसेंगे या काँटे की तरह खटकेंगे। ऊँचाई खानदान की दीवारों से नहीं, चरित्र की गहराई से मापी जाती है।

📝 NCERT-आधारित प्रश्न-उत्तर (लघु उत्तरीय)

प्रश्न 1. कविता में फूल और काँटे के बीच कौन-सी समानताएँ बताई गई हैं?

उत्तर: फूल और काँटा दोनों एक ही स्थान पर जन्म लेते हैं और एक ही पौधा उनका पालन-पोषण करता है। उन दोनों पर एक जैसी चाँदनी चमकती है, एक समान वर्षा (मेह) होती है और एक जैसी हवाएँ चलती हैं।

प्रश्न 2. काँटा तितलियों और भौंरों के साथ कैसा व्यवहार करता है?

उत्तर: काँटा तितलियों के सुंदर पंखों को कतर देता है और भौंरों के सांवले (श्याम) शरीर को बेध देता है। वह अपनी कठोरता से सबको हानि पहुँचाता है।

प्रश्न 3. फूल अपनी विशिष्टता किस प्रकार प्रदर्शित करता है?

उत्तर: फूल तितलियों को अपनी गोद में लेता है और भौंरों को अपना अनूठा रस पिलाता है। वह अपनी सुगंध और निराले रंगों से कली का मन प्रसन्न कर देता है।

प्रश्न 4. 'सुर शीश' पर कौन सुशोभित होता है और क्यों?

उत्तर: फूल 'सुर शीश' (देवताओं के सिर) पर सुशोभित होता है। इसका कारण उसका परोपकारी स्वभाव, कोमलता और दूसरों को प्रसन्नता देने का गुण है।

प्रश्न 5. कविता के अंत में 'कुल की बड़ाई' के संदर्भ में क्या निष्कर्ष निकाला गया है?

उत्तर: कविता का निष्कर्ष है कि यदि किसी व्यक्ति के स्वभाव और कर्मों में बड़प्पन की कमी है, तो केवल ऊँचे कुल में जन्म लेने से उसे सम्मान प्राप्त नहीं हो सकता।

प्रश्न 6. अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का जन्म कहाँ हुआ था और उनकी प्रसिद्ध काव्य-कृति कौन-सी है?

उत्तर: हरिऔध जी का जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में हुआ था। उनकी चर्चित काव्य-कृति 'प्रियप्रवास' है, जिसे खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है।

प्रश्न 7. 'हरिऔध' जी द्वारा बच्चों के लिए लिखे गए किन्हीं दो कविता-संकलनों के नाम लिखिए।

उत्तर: बच्चों के लिए उनके उल्लेखनीय कविता-संकलन 'चंद्र-खिलौना' और 'खेल-तमाशा' हैं।

प्रश्न 8. कविता के अनुसार 'बड़प्पन' का वास्तविक आधार क्या है?

उत्तर: बड़प्पन का आधार धन-दौलत या ऊँचा कुल नहीं है, बल्कि व्यक्ति के श्रेष्ठ गुण, उसका उदार स्वभाव और उसके द्वारा किए गए अच्छे कर्म ही उसकी वास्तविक पहचान हैं।

🧠 HOTS प्रश्न (उच्च चिंतन कौशल)

HOTS 1. यदि काँटा न होता, तो क्या फूल सुरक्षित रह पाता? क्या काँटे की कठोरता का कोई सकारात्मक पक्ष भी हो सकता है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

संकेत: काँटे फूल की रक्षा भी करते हैं — परंतु कविता का संदेश स्वभाव के चुनाव पर है, अस्तित्व पर नहीं। विद्यार्थी दोनों पक्षों पर विचार करें।

HOTS 2. समान परिवेश (धूप, वर्षा, हवा) मिलने पर भी फूल और काँटे का स्वभाव भिन्न होता है — इस विचार का मानव जीवन के संदर्भ में मूल्यांकन कीजिए।

संकेत: एक ही विद्यालय/परिवार के दो बच्चों के भिन्न आचरण का उदाहरण लें — परिवेश अवसर देता है, चुनाव व्यक्ति करता है।

HOTS 3. "किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर" — इस पंक्ति के आलोक में व्यक्तित्व निर्माण में कुल और कर्म की भूमिका पर विचार लिखिए।

संकेत: डिग्री/खानदान पद दिला सकते हैं, पर सम्मान केवल चरित्र से अर्जित होता है।

HOTS 4. आज के सोशल मीडिया युग में 'फूल' जैसे स्वभाव वाले व्यक्तियों की आवश्यकता क्यों है? 'काँटे' जैसे व्यवहार (ट्रोलिंग, कटु टिप्पणी) से समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है?

संकेत: ऑनलाइन संवाद में हमारा 'ढंग' ही तय करता है कि हम खुशबू बनेंगे या चुभन।

🔤 व्याकरण बिंदु: विशेषण-विशेष्य और मुहावरे

पद विशेषण (विशेषता बताने वाला) विशेष्य (जिसकी विशेषता बताई जाए)
श्याम तन श्याम (काला/सांवला) तन (शरीर)
वर बसन वर (श्रेष्ठ/सुंदर) बसन (वस्त्र)

💬 मुहावरा: 'जी खिलाना'

अर्थ: बहुत प्रसन्न करना। कविता के संदर्भ में — फूल अपनी सुगंध और सुंदरता से दूसरों के मन को आनंदित और प्रफुल्लित कर देता है। वाक्य प्रयोग: दादी की कहानियाँ सुनकर बच्चों का जी खिल गया।

🎯 20 प्रश्नों की MCQ क्विज़ (Interactive)

हर प्रश्न पर विचार कीजिए, फिर "उत्तर देखें" पर टैप/क्लिक करके अपना उत्तर जाँचिए। परीक्षा से पहले पूरी क्विज़ हल करना अनिवार्य है!

Q1. 'फूल और काँटा' कविता के कवि कौन हैं?

(A) सुमित्रानंदन पंत   (B) अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'   (C) मैथिलीशरण गुप्त   (D) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (B) अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'

Q2. यह कविता NCERT की किस पुस्तक में संकलित है?

(A) वसंत   (B) दूर्वा   (C) मल्हार   (D) बाल राम कथा

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (C) मल्हार (कक्षा 7, पाठ 3)

Q3. फूल और काँटा कहाँ जन्म लेते हैं?

(A) अलग-अलग बगीचों में   (B) एक ही जगह/पौधे पर   (C) जंगल और बगीचे में   (D) मिट्टी और पानी में

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (B) एक ही जगह/पौधे पर

Q4. 'मेह' शब्द का अर्थ क्या है?

(A) हवा   (B) चाँदनी   (C) बादल/वर्षा   (D) धूप

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (C) बादल/वर्षा

Q5. रात में फूल और काँटे पर एक जैसी क्या पड़ती है?

(A) ओस   (B) चाँदनी   (C) बर्फ   (D) छाया

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (B) चाँदनी

Q6. काँटा तितलियों के साथ क्या करता है?

(A) रस पिलाता है   (B) गोद में बिठाता है   (C) पंख कतर देता है   (D) सुगंध देता है

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (C) पंख कतर देता है

Q7. काँटा भौंरों के किस अंग को बेध देता है?

(A) पंख   (B) श्याम तन   (C) आँखें   (D) पैर

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (B) श्याम तन (सांवला शरीर)

Q8. 'वर बसन' का अर्थ है —

(A) पुराने कपड़े   (B) श्रेष्ठ/सुंदर वस्त्र   (C) फटे वस्त्र   (D) रंगीन धागे

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (B) श्रेष्ठ/सुंदर वस्त्र

Q9. फूल भौंरों को क्या पिलाता है?

(A) पानी   (B) दूध   (C) अनूठा रस   (D) ओस

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (C) अनूठा रस

Q10. फूल तितलियों को कहाँ स्थान देता है?

(A) अपनी गोद में   (B) पत्तों पर   (C) डाली पर   (D) जड़ों में

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (A) अपनी गोद में

Q11. फूल किसके शीश (सिर) पर सुशोभित होता है?

(A) राजा के   (B) देवताओं के   (C) माली के   (D) बच्चों के

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (B) देवताओं के ('सुर शीश')

Q12. कविता के अनुसार सम्मान किससे मिलता है?

(A) ऊँचे कुल से   (B) धन-दौलत से   (C) गुणों और कर्मों से   (D) सुंदरता से

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (C) गुणों और कर्मों से

Q13. हरिऔध जी का जन्म किस जिले में हुआ था?

(A) वाराणसी   (B) आजमगढ़   (C) प्रयागराज   (D) लखनऊ

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (B) आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश)

Q14. खड़ी बोली का पहला महाकाव्य कौन-सा माना जाता है?

(A) कामायनी   (B) साकेत   (C) प्रियप्रवास   (D) रामचरितमानस

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (C) प्रियप्रवास

Q15. 'चंद्र-खिलौना' और 'खेल-तमाशा' किस प्रकार की रचनाएँ हैं?

(A) उपन्यास   (B) बच्चों के कविता-संकलन   (C) नाटक   (D) कहानी-संग्रह

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (B) बच्चों के कविता-संकलन

Q16. 'श्याम तन' में विशेषण कौन-सा शब्द है?

(A) तन   (B) श्याम   (C) दोनों   (D) कोई नहीं

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (B) श्याम (विशेषण), तन (विशेष्य)

Q17. 'जी खिलाना' मुहावरे का अर्थ है —

(A) भोजन कराना   (B) बहुत प्रसन्न करना   (C) फूल खिलाना   (D) हँसाना

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (B) बहुत प्रसन्न करना

Q18. कविता में 'काँटा' किसका प्रतीक है?

(A) परोपकार   (B) विनम्रता   (C) अहंकार, ईर्ष्या और स्वार्थ   (D) प्रेम और दया

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (C) अहंकार, ईर्ष्या और स्वार्थ

Q19. 'बड़प्पन' शब्द में कौन-कौन से गुण सम्मिलित हैं?

(A) धन और शक्ति   (B) सहनशीलता, उदारता, विनम्रता, त्याग   (C) सुंदरता और यौवन   (D) पद और प्रतिष्ठा

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (B) सहनशीलता, उदारता, विनम्रता, त्याग

Q20. कविता का केंद्रीय संदेश क्या है?

(A) फूल काँटे से सुंदर है   (B) प्रकृति पक्षपात करती है   (C) महानता जन्म से नहीं, कर्म और गुणों से मिलती है   (D) काँटों से बचना चाहिए

✅ उत्तर देखें

सही उत्तर: (C) महानता जन्म से नहीं, कर्म और गुणों से मिलती है

🏆 परीक्षा टिप (Exam Tip)

परीक्षा में इस पाठ से सबसे अधिक पूछे जाने वाले 3 बिंदु — (1) फूल-काँटे की समानताएँ (जन्म, पौधा, चाँदनी, मेह, हवा), (2) 'श्याम तन' व 'वर बसन' का विशेषण-विशेष्य विश्लेषण, (3) "कुल की बड़ाई बनाम बड़प्पन" वाली अंतिम पंक्ति का भावार्थ। इन तीनों को अच्छे से तैयार कर लें।

⚡ एक नज़र में रिवीज़न नोट्स (Quick Revision)

🔹 कवि: अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' | जन्म: आजमगढ़ (उ.प्र.)

🔹 प्रसिद्ध कृति: प्रियप्रवास (खड़ी बोली का पहला महाकाव्य)

🔹 बाल-संकलन: चंद्र-खिलौना, खेल-तमाशा

🔹 पुस्तक: मल्हार (कक्षा 7), पाठ 3 | विधा: तुकान्त कविता

🔹 समानताएँ: एक जगह जन्म, एक पौधा, समान चाँदनी-मेह-हवा

🔹 काँटा: उंगली छेदे, वर बसन फाड़े, तितली के पंख कतरे, भौंरे का श्याम तन बेधे

🔹 फूल: तितली को गोद, भौंरे को अनूठा रस, कली का जी खिलाए, सुर शीश पर सोहे

🔹 संदेश: कुल की बड़ाई व्यर्थ, यदि बड़प्पन (गुण-कर्म) की कमी हो

🤖 AI सारांश (60 सेकंड में पूरा पाठ)

'फूल और काँटा' में हरिऔध जी बताते हैं कि एक ही पौधे पर जन्मे, एक जैसी चाँदनी, वर्षा और हवा पाने वाले फूल और काँटे के 'ढंग' बिल्कुल अलग होते हैं। काँटा उंगलियाँ छेदता है, वस्त्र फाड़ता है, तितलियों के पंख कतरता है और भौंरों को घायल करता है — इसलिए वह सबकी आँखों में खटकता है। फूल तितलियों को गोद देता है, भौंरों को रस पिलाता है और सबका मन खिलाता है — इसलिए वह देवताओं के मस्तक पर सुशोभित होता है। निष्कर्ष: ऊँचे कुल में जन्म व्यर्थ है, यदि व्यक्ति में बड़प्पन — सहनशीलता, उदारता, विनम्रता और त्याग — न हो। सम्मान जन्म से नहीं, कर्म से मिलता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

'फूल और काँटा' कविता किस कक्षा में है?

यह कविता NCERT की नई पाठ्यपुस्तक 'मल्हार' (कक्षा 7 हिंदी) के पाठ 3 के रूप में संकलित है। यह CBSE और KVS दोनों के पाठ्यक्रम में शामिल है।

'फूल और काँटा' कविता का मुख्य संदेश क्या है?

कविता का मुख्य संदेश है कि मनुष्य महान अपने जन्म या कुल से नहीं, बल्कि अपने कर्मों और गुणों से बनता है। हमें काँटे की तरह दूसरों को कष्ट देने वाला नहीं, बल्कि फूल की तरह खुशियाँ बाँटने वाला बनना चाहिए।

हरिऔध जी की सबसे प्रसिद्ध रचना कौन-सी है?

हरिऔध जी की सबसे प्रसिद्ध रचना 'प्रियप्रवास' है, जिसे खड़ी बोली हिंदी का पहला महाकाव्य माना जाता है।

कविता में फूल और काँटे में क्या-क्या समानताएँ हैं?

दोनों एक ही जगह जन्म लेते हैं, एक ही पौधा उन्हें पालता है, दोनों पर एक जैसी चाँदनी चमकती है, एक समान वर्षा होती है और एक जैसी हवाएँ बहती हैं।

'सुर शीश' का क्या अर्थ है?

'सुर शीश' का अर्थ है देवताओं का सिर। फूल अपने परोपकारी गुणों के कारण पूजा में देवताओं के मस्तक पर चढ़ाया जाता है — यही उसके सम्मान का प्रतीक है।

🌟 निष्कर्ष

अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की यह रचना पुरानी होकर भी 21वीं सदी के डिजिटल समाज के लिए एक बड़ा आईना है। अंत में, यह चुनाव आपका है — क्या आप अपने जीवन की बगिया में एक ऐसा काँटा बनना पसंद करेंगे जिसका अस्तित्व दूसरों को डराने और चोट पहुँचाने तक सीमित है? या आप वह फूल बनना चाहेंगे जो स्वयं संघर्षों में रहकर भी (काँटों के बीच) दुनिया को सुगंध और सौंदर्य का उपहार देता है?

"याद रखें, ऊँचाई खानदान की दीवारों से नहीं, चरित्र की गहराई से मापी जाती है।"

✍️ लेखक के बारे में (About the Author)

यह अध्ययन सामग्री Open Classes For All (openclasses.in) टीम द्वारा तैयार की गई है, जिसका नेतृत्व केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में कार्यरत एक अनुभवी शिक्षक कर रहे हैं। हमारी सभी सामग्री NCERT पाठ्यपुस्तकों और आधिकारिक CBSE पाठ्यक्रम पर आधारित होती है, तथा कक्षा-शिक्षण के वास्तविक अनुभव से समृद्ध की जाती है। अंतिम अपडेट: जुलाई 2026।

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