बचपन की कहानियाँ केवल सोने से पहले का मनोरंजन नहीं, बल्कि वे हमारे अवचेतन में नैतिकता के बीज बोने का माध्यम होती हैं। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की कालजयी कविता 'माँ, कह एक कहानी' हमें उसी स्मृति लोक में ले जाती है।
उनकी प्रसिद्ध काव्य-कृति 'यशोधरा' का यह अंश मात्र एक संवाद नहीं, बल्कि करुणा और न्याय के बीच के संघर्ष की एक गंभीर मीमांसा है। यहाँ माँ यशोधरा अपने पुत्र राहुल को उसके पिता, राजकुमार सिद्धार्थ (जो बाद में गौतम बुद्ध कहलाए), के जीवन की एक ऐसी घटना सुनाती हैं जो हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जीवन के कठिन मोड़ों पर हमारी प्राथमिकता क्या होनी चाहिए।
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2. संवादात्मक शैली और सक्रिय श्रवण: माँ-बेटे का अनूठा रिश्ता
साहित्यिक दृष्टिकोण से देखें तो इस कविता की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 'संवादात्मक शैली' है। यहाँ शिक्षा सीधे उपदेश के रूप में नहीं, बल्कि तर्क और विमर्श के माध्यम से दी गई है। राहुल एक 'हठी मानधन' बालक है जो कहानी सुनने की जिद्द करता है। वह कहता है—
"कहती है मुझसे यह चेटी, तू मेरी नानी की बेटी!"
— बालक राहुल की मासूम जिद
यहाँ 'चेटी' (सेविका) का उल्लेख महल के उस जीवंत परिवेश को दर्शाता है जहाँ परंपराएँ और कहानियाँ पीढ़ियों तक पहुँचती थीं।
एक 'लाइफ-स्किल कोच' के रूप में, मैं इस कविता में 'सक्रिय श्रवण' (Active Listening) का अद्भुत उदाहरण देखता हूँ। राहुल केवल कहानी सुन नहीं रहा, बल्कि माँ की पंक्तियों को दोहराकर अपनी जिज्ञासा प्रकट कर रहा है।
"बेटा, समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?"
— माँ यशोधरा का वात्सल्यपूर्ण उलाहना
जब माँ कहती हैं कि पानी लहरा रहा था, तो राहुल दोहराता है— "लहराता था पानी? हाँ, हाँ, यही कहानी।" यह दोहराव न केवल कविता के सौंदर्य और लय को बढ़ाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सीखने की प्रक्रिया में पूरी तरह डूबना (Engagement) कितना अनिवार्य है।
3. कोमल बनाम कठिन: उपवन की शांति और अचानक हुई हिंसा
कविता की 'वर्णनात्मक शैली' हमें एक सुरम्य उपवन में ले जाती है। गुप्त जी ने अत्यंत सूक्ष्मता से दृश्य रचा है: "वर्ण वर्ण के फूल खिले थे, झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे।" यहाँ प्रकृति की कोमलता और शांति का वास है। लेकिन अचानक, इस शांति को एक 'खर-शर' (तेज धार वाले तीर) द्वारा भेद दिया जाता है।
🌸 कोमल पक्ष
रंग-बिरंगे फूलों से भरा उपवन, झिलमिलाते हिम-बिंदु — प्रकृति की कोमलता और शांति का प्रतीक।
🏹 कठिन पक्ष
शिकारी का 'खर-शर' — एक हंस "विद्ध होकर" (घायल होकर) नीचे गिरता है। जीवन की अनिश्चितता का कठोर चेहरा।
यहाँ 'कोमल-कठिन' का विरोधाभास उभरता है जो जीवन की अनिश्चितता को दर्शाता है। सिद्धार्थ द्वारा उस घायल पक्षी को उठाना करुणा के पहले स्पर्श को दिखाता है, जो किसी भी विनाशकारी शक्ति के विरुद्ध 'रक्षक' के रूप में खड़ा होता है।
4. 'सदय' बनाम 'निर्दय': दो विरोधी विचारधाराओं का टकराव
जैसे ही रक्षक (सिद्धार्थ) पक्षी को बचाते हैं, वहाँ आखेटक (शिकारी) आ पहुँचता है। वह कोई साधारण शिकारी नहीं, बल्कि "लक्ष्य-सिद्धि का मानी" है — यानी वह जिसे अपने अचूक निशाने पर अहंकार है। यहाँ से कविता एक गहरे वैचारिक द्वंद्व में प्रवेश करती है।
"हुआ विवाद सदय-निर्दय में, उभय आग्रही थे स्वविषय में"
— करुणा बनाम अहंकार का द्वंद्व
यहाँ 'सदय' (दयालु) और 'निर्दय' (निर्दयी) के बीच का संघर्ष है। दोनों ही 'आग्रही' हैं, अर्थात अपनी बात पर अडिग हैं। शिकारी के लिए वह पक्षी केवल एक 'उपलब्धि' या मांस का टुकड़ा है, जबकि सिद्धार्थ के लिए वह रक्षा योग्य 'प्राण' है।
💼 आज का संदर्भ
आज के कॉर्पोरेट और सामाजिक जीवन में भी हम अक्सर यही टकराव देखते हैं — एक पक्ष अपनी 'लक्ष्य-सिद्धि' (Target achievement) के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है, वहीं दूसरा पक्ष मानवीय मूल्यों और करुणा को प्राथमिकता देता है।
5. न्याय का सर्वोच्च सिद्धांत: रक्षक का स्थान भक्षक से ऊपर
कहानी का सबसे प्रभावशाली मोड़ तब आता है जब माँ यशोधरा राहुल को ही 'न्यायाधीश' की कुर्सी पर बिठा देती हैं। वे पूछती हैं— "राहुल, तू निर्णय कर इसका— न्याय पक्ष लेता है किसका?" एक बालक का निष्पक्ष तर्क मानवता के सबसे बड़े सत्य को उजागर करता है।
राहुल कहता है कि यदि कोई निरपराध को मारता है, तो दूसरे को उसे बचाने का पूरा अधिकार है। बचाने वाले का स्थान, मारने वाले से सदैव ऊँचा होता है।
"रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!"
— बालक राहुल का न्याय-बोध
'न्याय दया का दानी' का अर्थ है कि सच्चा न्याय वही है जिसमें करुणा का समावेश हो। यहाँ 'उबारे' (बचाने) की शक्ति को 'मारने' की शक्ति पर वरीयता दी गई है।
💡 लीडरशिप की सीख
एक विश्लेषक के रूप में, मैं इसे 'लीडरशिप' का सबसे बड़ा गुण मानता हूँ — वह शक्ति जो विनाश के बजाय सृजन और संरक्षण का चुनाव करती है।
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6. निष्कर्ष: आज के समय में 'रक्षक' की भूमिका
मैथिलीशरण गुप्त की यह कविता केवल बुद्ध के जीवन का एक प्रसंग नहीं है, बल्कि यह हर युग के लिए एक नैतिक दिशा-निर्देश है। आज के दौर में, जहाँ गलाकाट प्रतिस्पर्धा (Toxic Competition) और संवेदनहीनता बढ़ रही है, क्या हम सिद्धार्थ की तरह 'रक्षक' बनने का साहस जुटा सकते हैं?
'भक्षक' बनना आसान है — किसी की भावनाओं को आहत करना, किसी के करियर को नुकसान पहुँचाना या पर्यावरण को नष्ट करना शिकारी के तर्क जैसा ही है। लेकिन 'रक्षक' बनना एक कठिन तपस्या है।
🪞 अंतिम प्रश्न
जब आपके सामने कोई 'घायल हंस' (कोई कमज़ोर या पीड़ित व्यक्ति) होगा, तो क्या आप शिकारी के 'लक्ष्य-सिद्धि' वाले तर्क को अपनाएंगे, या राहुल के उस बोध को, जो कहता है कि न्याय का आधार केवल करुणा होनी चाहिए?
आज के समाज में, क्या हमारा न्याय तंत्र वास्तव में करुणा पर आधारित है, या हम अभी भी शिकारी के तर्कों में उलझे हुए हैं?
याद रखें — रक्षक बनना ही सच्चे न्याय की पहली सीढ़ी है। 🪷
(A) संवाद शैली(B) प्रश्नोत्तर शैली(C) प्रकृति चित्रण(D) वैज्ञानिक शैली
उत्तर: (A), (B), (C)
प्रश्न 3. रिक्त स्थान भरिए (1 अंक | सरल)
16. कविता के रचयिता __________ हैं।
उत्तर: मैथिलीशरण गुप्त
17. माँ अपने पुत्र __________ को कहानी सुनाती है।
उत्तर: राहुल
18. घायल पक्षी एक __________ था।
उत्तर: हंस
19. विवाद का निर्णय __________ में हुआ।
उत्तर: न्यायालय
20. न्याय __________ का पक्ष लेता है।
उत्तर: दया / करुणा
प्रश्न 4. सही या गलत लिखिए (1 अंक | सरल)
21. राहुल अपनी माँ से कविता सुनाने का आग्रह करता है।
उत्तर: ✗ गलत
22. घायल हंस को आखेटक ने बचाया।
उत्तर: ✗ गलत
23. कविता का मुख्य संदेश करुणा और न्याय है।
उत्तर: ✓ सही
24. विवाद न्यायालय तक पहुँचा था।
उत्तर: ✓ सही
25. राहुल अन्याय का समर्थन करता है।
उत्तर: ✗ गलत
प्रश्न 26. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक | सरल)
26. कविता में माँ किसे कहानी सुनाती है?
उत्तर: माँ अपने पुत्र राहुल को कहानी सुनाती है।
27. कहानी में घायल पक्षी कौन था?
उत्तर: कहानी में घायल पक्षी हंस था।
28. हंस को किसने घायल किया था?
उत्तर: हंस को आखेटक (शिकारी) ने तीर मारकर घायल किया था।
29. घायल हंस को किसने बचाया?
उत्तर: घायल हंस को राहुल के तात (सिद्धार्थ) ने बचाया।
30. विवाद किन दो व्यक्तियों के बीच हुआ?
उत्तर: विवाद आखेटक और हंस को बचाने वाले सिद्धार्थ के बीच हुआ।
31. विवाद का निर्णय कहाँ हुआ?
उत्तर: विवाद का निर्णय न्यायालय में हुआ।
32. राहुल के अनुसार न्याय किसका पक्ष लेता है?
उत्तर: राहुल के अनुसार न्याय दयालु और रक्षक का पक्ष लेता है।
33. कविता का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: कविता का मुख्य संदेश करुणा, दया और न्याय का समर्थन करना है।
34. 'न्याय दया का दानी' से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: न्याय सदैव दया, करुणा और सत्य का साथ देता है।
35. कविता किस शैली में लिखी गई है?
उत्तर: कविता संवाद शैली में लिखी गई है।
प्रश्न 36. लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक | मध्यम)
36. राहुल बार-बार "माँ, कह एक कहानी" क्यों कहता है?
उत्तर: राहुल अत्यंत जिज्ञासु और कहानी सुनने का इच्छुक बालक है। वह अपनी माँ से वही प्रिय कहानी बार-बार सुनना चाहता है क्योंकि उसे उस कहानी से आनंद और शिक्षा दोनों मिलते हैं।
37. घायल हंस की कहानी का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: घायल हंस की कहानी के माध्यम से कवि ने करुणा, दया, न्याय तथा निर्दोष प्राणियों की रक्षा का संदेश दिया है। यह कहानी सही और गलत के बीच अंतर समझाती है।
38. आखेटक और सिद्धार्थ के बीच विवाद क्यों हुआ?
उत्तर: आखेटक ने तीर मारकर हंस को घायल किया था। सिद्धार्थ ने घायल हंस की रक्षा की। आखेटक हंस को अपना अधिकार बताता था जबकि सिद्धार्थ उसे बचाना चाहते थे। इसी कारण विवाद उत्पन्न हुआ।
39. माँ राहुल से स्वयं निर्णय करने के लिए क्यों कहती है?
उत्तर: माँ चाहती है कि राहुल सही-गलत का निर्णय स्वयं करे। इससे उसकी न्यायप्रियता, तर्कशक्ति तथा नैतिक सोच का विकास हो सके।
40. कविता में प्रकृति का चित्रण कैसे किया गया है?
उत्तर: कविता में उपवन, रंग-बिरंगे फूल, हिम-बिंदु, मंद समीर, लहराता जल तथा पक्षियों के मधुर स्वर का सुंदर और सजीव चित्रण किया गया है।
41. राहुल के उत्तर से उसके चरित्र की कौन-कौन-सी विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं?
उत्तर: राहुल दयालु, न्यायप्रिय, संवेदनशील, निर्भीक तथा विवेकशील बालक है। वह निर्दोष की रक्षा करने को उचित मानता है।
42. कविता का शीर्षक 'माँ, कह एक कहानी' क्यों उपयुक्त है?
उत्तर: पूरी कविता माँ और पुत्र के बीच कहानी सुनाने के संवाद पर आधारित है। इसलिए 'माँ, कह एक कहानी' शीर्षक विषयवस्तु के अनुरूप तथा अत्यंत सार्थक है।
प्रश्न 43. कारण बताइए (2 अंक | मध्यम)
43. माँ ने राहुल को कहानी के अंत में निर्णय करने के लिए क्यों कहा?
उत्तर: ताकि राहुल में सही-गलत की पहचान तथा न्याय करने की क्षमता विकसित हो सके।
44. न्यायालय में विवाद ले जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उत्तर: क्योंकि आखेटक और सिद्धार्थ दोनों अपने-अपने पक्ष पर अड़े हुए थे।
45. घायल हंस की रक्षा करना उचित क्यों था?
उत्तर: क्योंकि वह निर्दोष और असहाय था तथा उसकी रक्षा करना मानवता का धर्म है।
46. कविता में प्रकृति का वर्णन क्यों किया गया है?
उत्तर: कहानी को प्रभावशाली, सुंदर तथा जीवंत बनाने के लिए।
47. राहुल के उत्तर को आदर्श क्यों माना जाता है?
उत्तर: क्योंकि उसने दया, न्याय और मानवता का समर्थन किया।
प्रश्न 48. कथन एवं कारण (2 अंक | कठिन)
48. कथन (A): सिद्धार्थ ने घायल हंस को अपने पास रखा।
कारण (R): वे घायल पक्षी की रक्षा करना चाहते थे।
(A) दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।(B) दोनों सही हैं, पर कारण सही व्याख्या नहीं करता।(C) कथन सही है, कारण गलत है।(D) कथन गलत है, कारण सही है।
उत्तर: (A)
49. कथन (A): राहुल ने आखेटक का पक्ष लिया।
कारण (R): राहुल न्याय को दया का दानी मानता है।
(A) दोनों सही(B) कथन सही, कारण गलत(C) कथन गलत, कारण सही(D) दोनों गलत
उत्तर: (C)
50. कथन (A): कविता में संवाद शैली का प्रयोग हुआ है।
कारण (R): पूरी कविता प्रश्न-उत्तर और बातचीत के रूप में आगे बढ़ती है।
(A) दोनों सही तथा कारण सही व्याख्या करता है।(B) दोनों सही, पर कारण सही व्याख्या नहीं करता।(C) कथन सही, कारण गलत।(D) दोनों गलत।
उत्तर: (A)
प्रश्न 51. HOTS (Higher Order Thinking Skills) (3 अंक | कठिन)
51. यदि आप न्यायाधीश होते तो घायल हंस का निर्णय किसके पक्ष में देते? कारण सहित लिखिए।
उत्तर: मैं निर्णय सिद्धार्थ के पक्ष में देता क्योंकि उन्होंने घायल और निर्दोष प्राणी की रक्षा की। न्याय का उद्देश्य जीवन की रक्षा तथा करुणा का सम्मान करना है।
52. यदि आप राहुल की जगह होते तो माँ को क्या उत्तर देते?
उत्तर: मैं भी यही कहता कि निर्दोष प्राणी की रक्षा करना सबसे बड़ा धर्म है। न्याय सदैव दया और मानवता का साथ देना चाहिए।
53. इस कविता की शिक्षा आज के समाज में किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर: आज भी हमें कमजोर, असहाय और पीड़ित लोगों की सहायता करनी चाहिए तथा हर परिस्थिति में न्याय, दया और मानवता का पालन करना चाहिए।
54. 'माँ, कह एक कहानी' कविता का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
इस कविता में माँ (यशोधरा) और पुत्र (राहुल) के बीच अत्यंत रोचक संवाद प्रस्तुत किया गया है। राहुल बार-बार अपनी माँ से कहानी सुनाने का आग्रह करता है। माँ उसे एक घायल हंस की कहानी सुनाती है। हंस को एक आखेटक तीर मारकर घायल कर देता है। सिद्धार्थ उस घायल हंस की रक्षा करते हैं। दोनों के बीच हंस के अधिकार को लेकर विवाद होता है जो न्यायालय तक पहुँचता है। अंत में माँ राहुल से स्वयं निर्णय करने को कहती है। राहुल बताता है कि न्याय सदैव दया और करुणा का पक्ष लेता है। कविता हमें करुणा, मानवता, न्याय और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की प्रेरणा देती है।
55. कविता के आधार पर राहुल के चरित्र का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राहुल एक जिज्ञासु, संवेदनशील, न्यायप्रिय और दयालु बालक है। वह कहानी सुनने के लिए उत्सुक रहता है। वह बिना किसी भय के अपना मत व्यक्त करता है। उसके विचारों से स्पष्ट होता है कि वह निर्दोष की रक्षा करना अपना कर्तव्य मानता है। उसमें करुणा, विवेक, सत्यनिष्ठा तथा न्यायप्रियता जैसे उच्च मानवीय गुण विद्यमान हैं।
56. कविता में निहित नैतिक मूल्यों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
कविता में करुणा, दया, न्याय, मानवता, सत्य, निर्भीकता तथा विवेक जैसे उच्च नैतिक मूल्यों का संदेश दिया गया है। यह शिक्षा देती है कि हमें सदैव पीड़ित और असहाय व्यक्तियों की सहायता करनी चाहिए तथा किसी भी परिस्थिति में न्याय का साथ देना चाहिए। सही निर्णय वही है जिसमें मानवता और संवेदनशीलता का समावेश हो।
प्रश्न 57. शब्दार्थ लिखिए (1 अंक | सरल)
शब्द -अर्थ
आखेटक- शिकारी
उपवन -बगीचा
खर-शर तीक्ष्ण तीर
करुणा- दया
न्याय -उचित निर्णय
हठ- ज़िद
पक्षी -चिड़िया
भ्रमण- घूमना
मानधन -प्रिय पुत्र
दानी -देने वाला
प्रश्न 58. पर्यायवाची शब्द लिखिए (1 अंक | सरल)
शब्द- पर्यायवाची
माँ- जननी, माता
पक्षी -खग, विहंग
जल -पानी, नीर
फूल -पुष्प, सुमन
न्याय- इंसाफ, उचित निर्णय
दया -करुणा, कृपा
राजा -नरेश, भूप
वन -अरण्य, जंगल
प्रश्न 59. विलोम शब्द लिखिए (1 अंक | सरल)
शब्द -विलोम
न्याय -अन्याय
दया -क्रूरता
जीवन- मृत्यु
बड़ा- छोटा
सत्य- असत्य
जीत- हार
कोमल- कठोर
रक्षक- भक्षक
प्रश्न 60. समानार्थी मिलान कीजिए (1 अंक | मध्यम)
स्तंभ–1 स्तंभ–2
1. आखेटक (घ) शिकारी
2. उपवन (क) बगीचा
3. करुणा (ग) दया
4. न्याय (ख) उचित निर्णय
उत्तर
1 – (घ)
2 – (क)
3 – (ग)
4 – (ख)
प्रश्न 61. पात्रों का मिलान कीजिए (1 अंक | सरल)
पात्र परिचय
1. राहुल (ख) पुत्र
2. यशोधरा (ग) माता
3. सिद्धार्थ (क) पिता
4. आखेटक (घ) शिकारी
उत्तर
1 – (ख)
2 – (ग)
3 – (क)
4 – (घ)
प्रश्न 62. संवाद पूर्ण कीजिए (2 अंक | मध्यम)
(क) राहुल – ______________________
उत्तर: "माँ, कह एक कहानी।"
(ख) माँ – ______________________
उत्तर: "बेटा, समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?"
(ग) राहुल – ______________________
उत्तर: "हाँ माँ, वही कहानी सुनाओ।"
(घ) माँ – ______________________
उत्तर: "राहुल, तू निर्णय कर इसका।"
प्रश्न 63. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (1 अंक | सरल)
घायल ________ को सिद्धार्थ ने बचाया।
उत्तर: हंस
न्याय ________ का दानी होता है।
उत्तर: दया
विवाद ________ में पहुँचा।
उत्तर: न्यायालय
कविता के कवि ________ हैं।
उत्तर: मैथिलीशरण गुप्त
राहुल ________ का पुत्र था।
उत्तर: सिद्धार्थ
प्रश्न 64. एक शब्द में उत्तर दीजिए (1 अंक | सरल)
घायल पक्षी कौन था?
उत्तर: हंस
शिकारी का दूसरा नाम?
उत्तर: आखेटक
कविता का मुख्य पात्र?
उत्तर: राहुल
कहानी किसने सुनाई?
उत्तर: यशोधरा
न्याय किसका साथ देता है?
उत्तर: दया
प्रश्न 65. भाषा कौशल आधारित प्रश्न (2 अंक | मध्यम)
65.1 'न्याय दया का दानी' का भावार्थ लिखिए।
उत्तर: न्याय सदैव करुणा, मानवता और सत्य का साथ देता है। सही न्याय वही है जिसमें संवेदनशीलता और दया का समावेश हो।
65.2 'कोई निरपराध को मारे' पंक्ति से कवि क्या संदेश देना चाहते हैं?
उत्तर: किसी भी निर्दोष प्राणी पर अत्याचार नहीं करना चाहिए। यदि किसी पर अन्याय हो रहा हो तो उसकी रक्षा करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
प्रश्न 66. मूल्य आधारित प्रश्न (3 अंक | कठिन)
66. यदि आपके सामने किसी कमजोर व्यक्ति के साथ अन्याय हो रहा हो तो आप क्या करेंगे?
उत्तर:
मैं अन्याय का विरोध करूँगा, पीड़ित व्यक्ति की सहायता करूँगा तथा आवश्यकता पड़ने पर शिक्षक, अभिभावक अथवा संबंधित अधिकारी को सूचना दूँगा। मैं सदैव न्याय, करुणा और मानवता का पालन करूँगा।
माँ कह एक कहानी
माँ, कह एक कहानी
पहला प्रसंग
“माँ, कह एक कहानी।”
“बेटा, समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?”
व्याख्या: राहुल अपनी माँ से कहानी सुनाने को कहता है। माँ हँसते हुए पूछती हैं कि क्या वह उसे अपनी नानी समझने लगा है। यह माँ-बेटे के प्रेम को दर्शाता है।
दूसरा प्रसंग
“कहती है मुझसे यह चेटी, तू मेरी नानी की बेटी! कह माँ, कह, लेटी ही लेटी, राजा था या रानी? राजा था या रानी? माँ, कह एक कहानी।”
व्याख्या: राहुल बताता है कि दासी ने कहा है कि माँ नानी की बेटी है। वह राजा-रानी की कहानी सुनाने की ज़िद करता है।
तीसरा प्रसंग
“तू है हठी मानधन मेरे, सुन, उपवन में बड़े सबेरे, तात भ्रमण करते थे तेरे, जहाँ, सुरभि मनमानी।”
व्याख्या: माँ राहुल को समझाती है और सुंदर उपवन का वर्णन करती है जहाँ उसके पिता सैर करते थे।
चौथा प्रसंग
“जहाँ सुरभि मनमानी? हाँ, माँ, यही कहानी।”
व्याख्या: राहुल उसी उपवन वाली कहानी सुनने की इच्छा जताता है।
पाँचवाँ प्रसंग
“वर्ण-वर्ण के फूल खिले थे, झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे, हलके झोंके हिले-मिले थे, लहराता था पानी।”
व्याख्या: बगीचे में रंग-बिरंगे फूल, ओस की बूँदें, मंद हवा और लहराता जल था।
छठा प्रसंग
“लहराता था पानी? हाँ, हाँ, यही कहानी।”
व्याख्या: राहुल आनंद से कहानी आगे सुनने को कहता है।
सातवाँ प्रसंग
“गाते थे खग कल-कल स्वर से, सहसा एक हंस ऊपर से, गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से, हुई पक्ष की हानी!”
व्याख्या: एक घायल हंस तीर लगने से नीचे गिर पड़ता है।
आठवाँ प्रसंग
“हुई पक्ष की हानी? करुणा-भरी कहानी!”
व्याख्या: राहुल दुख व्यक्त करता है।
नौवाँ प्रसंग
“चौंक उन्होंने उसे उठाया, नया जन्म-सा उसने पाया। इतने में आखेटक आया, लक्ष्य-सिद्ध का मानी।”
व्याख्या: राहुल के पिता हंस को बचाते हैं, तभी शिकारी आता है।
दसवाँ प्रसंग
“लक्ष्य-सिद्ध का मानी? कोमल-कठिन कहानी।”
व्याख्या: राहुल को यह कहानी संवेदना और कठोरता का मेल लगती है।
ग्यारहवाँ प्रसंग
“माँगा उसने आहत पक्षी, तेरे तात मगर थे रक्षी। तब उसने, जो था खगभक्षी— हठ करने की ठानी।”
व्याख्या: शिकारी घायल हंस माँगता है लेकिन राहुल के पिता उसकी रक्षा करते हैं।
बारहवाँ प्रसंग
“हठ करने की ठानी? अब बढ़ चली कहानी।”
व्याख्या: राहुल उत्सुकता से कहानी आगे सुनता है।
तेरहवाँ प्रसंग
“हुआ विवाद सदय-निर्दय में, उभय आग्रही थे स्वविषय में, गई बात तब न्यायालय में, सुनी सभी ने जानी।”
व्याख्या: विवाद न्यायालय तक पहुँच जाता है।
चौदहवाँ प्रसंग
“सुनी सभी ने जानी? व्यापक हुई कहानी।”
व्याख्या: अब यह विवाद सबको ज्ञात हो जाता है।
पंद्रहवाँ प्रसंग
“राहुल, तू निर्णय कर इसका— न्याय पक्ष लेता है किसका? कह दे निर्भय, जय हो जिसकी। सुन लूँ तेरी बानी।”
व्याख्या: माँ राहुल से न्यायपूर्ण निर्णय देने को कहती है।
सोलहवाँ प्रसंग
“माँ, मेरी क्या बानी? मैं सुन रहा कहानी।”
व्याख्या: राहुल अभी निर्णय देने में संकोच करता है।
सत्रहवाँ प्रसंग
“कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य उसे न उबारे? रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!”
व्याख्या: राहुल कहता है कि निर्दोष की रक्षा करना ही सच्चा न्याय है।
अठारहवाँ प्रसंग
“न्याय दया का दानी? तूने गूनी कहानी।”
व्याख्या: माँ राहुल की समझदारी की प्रशंसा करती है।
कविता से शिक्षा
यह कविता करुणा, दया, न्याय और सही निर्णय लेने की प्रेरणा देती है।
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