rajni class 11 hindi | रजनी आरोह | rajini class 11 hindi | rajani

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NCERT Solutions for Class 11 Hindi Aroh 



 ध्वनि प्रस्तुति 


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 शब्दार्थ 


  • काट देना-छोड़ देना। 
  • भोग लगाना-खाना।
  • मेधावी होशियार। 
  • कांग्रेचुलेशंस-बधाई हो, मुबारक हो। 
  • सफाई-वफाई-लिखते समय होने वाली छोटी गलतियाँ व काट-छोट।
  • सफाई देना-अपने बचाव में कहना। 
  • आर्थिक-धन संबंधी। 
  • अँधेर-अन्याय। 
  • बल पड़ना-तनाव आना। 
  • स्वीकृति-मंजूरी। 
  • टर्मिनल-सत्र। 
  • हाफ-ईयरली-छमाही।
  • बदमाशी-मनमानी। 
  • घुड़कना-डाँटना।
  • जुलुम-ज़्यादती-अन्याय-अत्याचार। 
  • बर्दाश्त-सहन। 
  • दनदनाती-तेज कदमों से। 
  • असहाय-बेचारा। 
  • अदब-सम्मान। 
  • ईयरली-वार्षिक।
  • गलतफहमी-गलत अनुमान। 
  • एकज़ामिनर-परीक्षक। 
  • तैश-क्रोध। 
  • व्हॉट डू यू मीन-क्या मतलब है आपका। 
  • हरकत-गलत कार्य।
  • धाँधली-गलत कार्य। 
  • बेगुनाह-बेकसूर। 
  • शिकजा-पकड़। 
  • घिनौना-सामाजिक दृष्टि से गलत काम। 
  • रैकेट-गैरकानूनी काम करने वालों का समूह। 
  • चिदियाँ बिखेरना-छोटे-छोटे टुकड़े करके फेंकना।
  • गदगद-प्रसन्न। 
  • ठेका लेना-जिम्मेदारी लेना।
  • गुनहगार-दोषी। 
  • हिकारत-उपेक्षा। 
  • माई फुट-तुच्छ समझना। 
  • हताश-निराश। 
  • सूली पर चढ़ाना-संकट में डालना। 
  • डायरेक्टर-निदेशक। 
  • निज़ी-व्यक्तिगत।
  • कौतूहल-जिज्ञासा। 
  • रिलेशंस-संबंध। 
  • रिसर्च-शोध। 
  • प्रोजेक्ट-कार्य।
  • रिकगनाइज़-मान्य। 
  • ग्रांट-सरकारी अनुदान। 
  • एड-सहायता। 
  • कोंचता-तंग करना।
  • एक्शन-कार्यवाही। 
  • दखलअंदाजी-हस्तक्षेप। 
  • दिन-दहाड़े-सरेआम। 
  • छेद-कमी। 
  • गड्ढे में जाना-नष्ट होना। 
  • मोंटाज-टेलीविजन में दृश्यों व छवियों को एकत्रित करके जोड़ना।
  • बाकायदा-कायदे के अनुसार। 
  • एकाएक-अचानक। 
  • इश्यू-मामला। 
  • आँख मूंदना-ध्यान न देना। 
  • आवेश-जोश।
  • राइट-अप-लिखित विषय-सामग्री। 
  • पी.टी.आई-एक समाचार-एजेंसी। 
  • फोकस-ध्यान।
  • दस्तख्त-हस्ताक्षर। 
  • पदाफाश-भेद खोलना। 
  • राय-मत। 
  • एपूल्ड-स्वीकृत।
  • धज्जियाँ बिखेरना-फाड़कर फेंकना।


rajni class 11 hindi question answer
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 पाठ के साथ 


प्रश्न. 1. रजनी ने अमित के मुद्दे को गंभीरता से लिया, क्योंकि –

(क) वह अमित से बहुत स्नेह करती थी। 
(ख) अमित उसकी मित्र लीला का बेटा था।
(ग) वह अन्याय के विरुद्ध आवाज़ की सामर्थ्य रखती थी।
(घ) उसे अखबार की सुर्खियों में आने का शौक था।

उत्तर: (ग) वह अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की सामर्थ्य रखती थी।

प्रश्न. 2. 
जब किसी का बच्चा कमज़ोर होता है, तभी उसके माँ-बाप ट्यूशन लगवाते हैं। अगर लगे कि कोई टीचर लूट रहा है, तो उस टीचर से न ले ट्यूशन, किसी और के पास चले जाएँ… यह कोई मज़बूरी तो है नहीं
–प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताएँ कि यह संवाद आपको किस सीमा तक सही या गलत लगता है, तर्क दीजिए।

उत्तर: प्रसंग – रजनी शिक्षा निदेशक के पास ट्युशन के रैकेट के बारे में बताती है। वह कहती है कि बच्चों को जबरदस्ती ट्युशन करने के लिए कहा जाता है। ऐसे लोगों के खिलाफ बोर्ड क्या कर रहा है? निदेशक इस बात को गंभीरता से नहीं लेकर यह बात कहता है। निदेशक का उपरोक्त वक्तव्य गैरजिम्मेदाराना है। वह ट्यूशन को गलत नहीं मानता। वह इसके जरिए बच्चों के शोषण को नहीं रोकना चाहता। वह अपने अधिकारों का इस्तेमाल करके इस व्यवस्था को ठीक कर सकता है।

अथवा 

रजनी के ट्यूशन रैकेट के बारे में शिकायत करते हुए, शिक्षा निदेशक ने रजनी से बहुत आसानी से कह दिया कि "जब किसी का बच्चा कमज़ोर होता है, तभी उसके माँ-बाप उसे ट्यूशन लगवाते हैं। यदि कभी लगे कि कोई टीचर आपको लूट रहा है, तो उस टीचर से ना ले ट्यूशन, किसी और के पास चले जाएँ..यह कोई मजबूरी तो है नहीं।" शिक्षा निदेशक ने रजनी को जो जवाब दिया वह बहुत गलत और गैर-जिम्मेदाराना है, किसी भी शिक्षा निदेशक का ऐसी बातें कहना निंदनीय है । इस प्रकार अपनी जिम्मेदारियों से दूर भागकर, वे शिक्षकों की गलत नीति और उनके गलत व्यवहार को बढ़ावा दे रहे हैं।

प्रश्न. 3. तो एक और आंदोलन का मसला मिल गया- फुसफुसाकर कही गई यह बात-

(क) किसने किस प्रसंग में कही?
उत्तर: यह बात रजनी के पति रवि ने पेरेंट्स मीटिंग के दौरान कही। रजनी ने भाषण देते वक्त प्राइवेट स्कूल के टीचर्स की समस्याओं का जिक्र किया। उन्हें कम तनख्वाह मिलती थी। रजनी उन्हें संगठित होकर आदोलन चलाने की सलाह दे रही थी ताकि इस अन्याय का पर्दाफाश हो सके।

(ख) इससे कहने वाले की किस मानसिकता का पता चलता है।
उत्तर: रवि की इस बात से उसकी उदासीन प्रवृत्ति का पता चलता है। वह समाज में होने वाले अन्याय को देखकर कोई प्रतिक्रिया नहीं करता। वह स्वार्थी है तथा अपने तक ही सीमित रहता है।

अथवा

रजनी के पति ने एक पैरेंट मीटिंग के दौरान यह बात कही। रजनी ने अपना भाषण देते समय निजी विद्यालयों के शिक्षकों की समस्याओं का वर्णन किया। कुछ शिक्षकों को अधिक वेतन पर हस्ताक्षर करवा के कम वेतन दिया जाता है। शिक्षकों के साथ हो रहे, इस अन्याय का पर्दाफाश करने के लिए रजनी, उन्हें आंदोलन चलाने की सलाह देती हैं।

प्रश्न. 4. रजनी धारावाहिक की इस कड़ी की मुख्य समस्या क्या है? 
उत्तर :  रजनी धारावाहिक की मुख्य समस्या है-ट्यूशन न लगाने पर अध्यापक द्वारा छात्र को कम अंक प्रदान करना। विद्यार्थी की मेहनत को महत्त्वहीन कर देना।

क्या होता अगर –

(क) अमित का पर्चा सचमुच खराब होता।
उत्तर: अगर अमित का पर्चा सचमुच खराब होता तो वह इतना दुखी नहीं होता। उसकी माँ व रजनी भी परेशान नहीं होती। रजनी को भी आंदोलन नहीं करना पड़ता।

(ख) संपादक रजनी का साथ न देता।
उत्तर: यदि संपादक रजनी का साथ न देता तो यह समस्या सीमित लोगों के बीच रह जाती। कम संख्या का सत्ता पर कोई असर नहीं होता।

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 पाठ के आस-पास 


प्रश्न. 1. गलती करनेवाला तो है ही गुनहगार, पर उसे बर्दाश्त करनेवाला भी कम गुनहगार नहीं होता-इस संवाद के संदर्भ में आप सबसे ज्यादा किसे और क्यों गुनहगार मानते हैं?

उत्तर: इस संवाद के संदर्भ में सबसे ज्यादा दोषी गणित अध्यापक के अत्याचार को सहने वाला है। अध्यापक ट्यूशन लेने के लिए डराता है, कम अंक देता है। इस कार्य को सहन करने से उसका हौसला बढ़ता है। उसका विरोध करके उसे दबाया जा सकता है।

अथवा 

गणित के शिक्षक इस संवाद के मामले में सबसे बड़े दोषी हैं, लेकिन ये कहना भी गलत नहीं है कि, जिन छात्रों और उनके माता-पिता ने आंखे बंद करके उनके साथ होने वाले इन अत्याचारों को झेला है, वे भी कम दोषी नहीं हैं। शिक्षक अपने छात्र को ट्यूशन लेने के लिए डराता धमकाता है और न मानने पर  कम अंक देता है, और यदि छात्र इस अन्याय को सहन कर लेता है तो उसे प्रोत्साहना मिलती है। यदि हम चाहें तो, इसका विरोध करके इसे दबाया जा सकता है और इस दबाब से भरे शिक्षा नीति से छुटकारा पाया जा सकता है। अगर देखा जाए तो दोनों को दोष दिया जाना चाहिए: पहला शिक्षक जो जबरन ट्यूशन देते हैं, और ना लेने पर छात्रों के साथ बुरा व्यवहार करतें है,और दूसरा ट्यूशन और शिक्षकों को बढ़ावा देने वाले छात्र और उनके माता-पिता भी इसके बराबर के दोषी हैं।

प्रश्न. 2. स्त्री के चरित्र की बनी बनाई धारणा से रजनी का चेहरा किन मायनों में अलग है?

उत्तर: रजनी वह स्त्री है जो कहीं भी हो रहे अन्याय को नज़रअंदाज़ नहीं कर पाती। वह उसकी जड़ तक जाकर उसे नष्ट करके ही दम लेती है, जबकि भारतीय समाज में स्त्री सहनशीलता, शालीनता और कोमलता का प्रतीक मानी जाती है। संघर्ष करते समय सहन करने और शालीन बने रहने का तो सवाल ही नहीं उठता। जब अत्याचारी का विरोध करें तो हमें भी कठोर बनना ही पड़ता है। अतः तथाकथित स्त्रियोचित गुणों को त्यागकर ही रजनी का चेहरा तैयार होता है जो बनी। हुई धारणों से काफ़ी अलग है।

अथवा 

रजनी आम महिलाओं सी नही है,वह उनसे अलग है, वह अन्य महिलाओं की तरह चुप चाप सिर्फ सुनती नही है, वह बहादुर है, अन्याय का विरोध करती है। हमारे आस पास, गांव समाज में  जो धारणा है, उसके अनुसार महिलाएं बहुत शक्तिहीन और डरपोक होती हैं, वे  अन्याय का विरोध नहीं करती  और संघर्षों से दूर रहती हैं। रजनी इन सब के विपरीत है, एक संघर्षशील और निडर वक्ति, जो हर स्त्री के लिए एक मिशाल है। वह अपने सामने होने वाले किसी भी अन्याय को सहन नहीं कर सकती। उसके पति द्वारा गलती करने पर वह उसे भी डांट लगा देती है, उसके लिए सभी एक समान है, गलत तो गलत है वह सदैव, अपनी बात पर दृढ़ रहती है। ट्यूशन रैकेट के बारे में भी रजनी अधिकारीयों से विरोध जाहिर करती है। वह ट्यूशन के विरोध में न्याय के लिए जन-आन्दोलन खड़ा कर देती है।


प्रश्न. 3. पाठ के अंत में मीटिंग के स्थान का विवरण कोष्ठक में दिया गया है। यदि इसी दृश्य को फ़िल्माया जाए तो आप कौन-कौन से निर्देश देंगे?

उत्तर: यदि मीटिंग दृश्य फिल्माया जाए तो हम निम्नलिखित निर्देश देंगे-

  • स्टेज के पीछे बैनर लगा हो तथा उस पर एजेंडा लिखा होना चाहिए।
  • मीटिंग स्थल पर प्रवेश करने वालों को जोश से आना-जाना होगा।
  • स्टेज पर माइक व कुर्सी होनी चाहिए।
  • रजनी को डायलॉग्स पूरे याद होने चाहिए।
  • तालियाँ इत्यादि समयानुसार बजें।

बैठक के पीछे एक मंच तैयार होना चाहिए और उस पर लिखे एजेंडे के साथ एक बैनर भी होना चाहिए।मंच में एक माइक, कुर्सी, पोडियम के साथ-साथ पीने का पानी और चश्मा आदि होना चाहिए। सभा स्थल पर आने और जाने वाले लोगों में जोश और उत्साह होना चाहिए। रजनी को अपने संवादों को पूरी तरह याद रखना चहिए।यह ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है कि लोगों या दर्शकों की भीड़ को ताली बजाने के अंतराल के बारे में पता है और ताली को समय पर रखा जाना चाहिए।


प्रश्न. 4. इस पटकथा में दृश्य संख्या का उल्लेख नहीं है। मगर गिनती करें तो सात दृश्य हैं। आप किस आधार पर इन दृश्यों को अलग करेंगे?

उत्तर: सभी दृश्यों को उनके स्थान के आधार पर अलग किया जाना चाहिए। प्रथम दृश्य में अमित का घर और दूसरे में रजनी का घर है, तो दोनों स्थान अलग-अलग हैं। अतः उन्हें फ़िल्माने के लिए और भिन्न-भिन्न दिखाने के लिए दृश्य बदलना ही होगा। इसी तरह प्रधानाध्यापक का कमरा, निदेशक का कमरा; इन सभी स्थानों की सज्जा और दृश्यांकन बिलकुल अलग होगा इसलिए ये सब दृश्यों को अलग करने का आधार कहे जा सकते हैं।



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 भाषा की बात 


प्रश्न. 1. निम्नलिखित वाक्यों के रेखांकित अंश में जो अर्थ निहित हैं उन्हें स्पष्ट करते हुए लिखिए –

(क) वरना तुम तो मुझे काट ही देतीं।
उत्तर: काट ही देतीं-भूल ही जाना।

स्पष्टीकरण-रजनी कहती है कि यदि वह लीला के घर न आती तो वह उसे मिठाई खिलाने की बात भूल जाती।

(ख) अमित जबतक तुम्हारे भोग नहीं लगा लेता, हम लोग खा थोड़े ही सकते हैं।
उत्तर : भोग नहीं लगा-चखाना।

स्पष्टीकरण-लीला कहती है कि अमित जब तक रजनी को खिला नहीं लेता, तब तक वह किसी और को नहीं खिलाता।

थोड़े ही-नहीं।

स्पष्टीकरण-वह हमें तब तक खाने नहीं देता जब तक वह तुम्हें न खिला आए।

(ग) बस-बस, मैं समझ गया।
उत्तर:  बस-बस-अधिक कहने की जरूरत नहीं।

स्पष्टीकरण-संपादक महोदय रजनी की बात पर यह कहते हैं।




 कोड मिक्सिग/कोड स्विचिंग 


प्रश्न. 1. कोई रिसर्च प्रोजेक्ट है क्या? व्हेरी इंटरेस्टिंग सब्जेक्ट।

ऊपर दिए गए संवाद में दो पंक्तियाँ हैं, पहली पंक्ति में रेखांकित अंश हिंदी से अलग अंग्रेजी भाषा का है, जबकि शेष हिंदी भाषा का है। दूसरा वाक्य पूरी तरह अंग्रेज़ी में है। 

कोड मिक्सिंग 

हम बोलते समय कई बार एक ही वाक्य में दो भाषाओं (कोड) का इस्तेमाल करते हैं। यह कोड मिक्सिंग कहलाता है, 

कोड स्विचिंग

जबकि एक भाषा में बोलते-बोलते दूसरी भाषा का इस्तेमाल करना कोड स्विचिंग कहलाता है। 

पाठ में से कोड मिक्सिंग और कोड स्विचिंग के तीन-तीन उदाहरण चुनिए और हिंदी भाषा में रूपांतरण करके लिखिए।

उत्तर:

कोड मिक्सिंग –


  • सिक्स्थ पोजीशन आई है।
  • मैं सैवंथ क्लास के अमित की मैथ्स की कॉपी देखना चाहती हूँ।
  • स्कूल में आजकल प्राइवेट ट्यूशंस का चलन है।
  • कोई रिसर्च प्रोजेक्ट है क्या?



कोड स्विचिंग –


  • बोर्ड का काम ही यही है। इस आवर ड्यूटी मैडम।
  • कांग्रेचुलेशंस अमित, बधाई
  • विल यू प्लीज़ गेट आउट दिस रूम, मेम साहब को बाहर ले जाओ।
  • बैठिए, प्लीज सिडाउन



 पटकथा की दुनिया 


आपने दूरदर्शन या सिनेमा हॉल में अनेक चलचित्र देखे होंगे। परदे पर चीजें जिस सिलसिलेवार ढंग से चलती हैं उसमें पटकथा का विशेष योगदान होता है। पटकथा कई महत्त्वपूर्ण संकेत देती है; जैसे –


  • कहानी/कथा
  • संवादों की विषय-वस्तु
  • संवाद अदायगी का तरीका
  • आस-पास का वातावरण/दृश्य
  • दृश्य का बदलना।


इस पुस्तक के अपने पसंदीदा पाठ के किसी एक अंश को पटकथा में रूपांतरित कीजिए।

उत्तर: विद्यार्थी अध्यापक की सहायता लें।




अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर


प्रश्न. 1. अमित और उसकी भाँति अनेक विद्यार्थियों ने परेशान होकर भी आवाज़ क्यों नहीं उठाई ?

उत्तर: इस समस्या का विरोध न करने का कारण विद्यार्थियों का यह सोचना था कि जो भी विरोध करेगा उसे आगामी परीक्षा में और भी अधिक बुरे परिणाम भुगतने पड़ेंगे। अध्यापक उनसे चिढ़कर कक्षा में उन्हें अपमानित करेंगे। अगली परीक्षा में और भी कम अंक प्रदान करेंगे। अध्यापक का कुछ नहीं होगा, लेकिन हमारा भविष्य बिगड़ जाएगा-यही सोचकर सब चुप थे। इसका प्रमाण यह है कि अमित और उसकी माँ ने भी रजनी को रोकने का प्रयत्न किया था। बच्चा योग्य है फिर भी वे भयभीत थे। यह भीरु प्रकृति ही दब्बूपन का कारण है।

प्रश्न. 2. यदि रजनी को प्रधानाध्यापक का सहयोग मिल जाता तो क्या परिणाम हो सकते थे?

उत्तर: यदि प्रधानाध्यापक से सहयोग मिलता तो रजनी वहीं अमित की कॉपी (वार्षिक परीक्षा की) खुलवाकर यह बात साबित कर सकती थी कि कॉपी की जाँच जानबूझकर गलत की गई है सही उत्तर में कम अंक दिए गए हैं। उसी समय प्रधानाध्यापक अपने स्तर पर गणित अध्यापक से पूछताछ करते और आवश्यक कदम उठाते, लेकिन ऐसी होने पर यह समस्या इतने व्यापक रूप से पूरे शहर में एक आंदोलन का रूप न ले पाती। अमित को भी बुरे परिणामों का सामना करना पड़ सकता था, क्योंकि तब यह समस्या एक बालक तक ही सीमित रह जाती।

प्रश्न. 3. कम वेतन देनेवाले स्कूलों के खिलाफ रजनी के दूसरे आंदोलन के विषय पर टिप्पणी करें।

उत्तर: रजनी स्वभाव से आंदोलनकारी है। अतः ट्यूशन की समस्या से संघर्ष करते समय उसे अध्यापकों को मिल रहे कम वेतन की जानकारी मिलती है। यह जानते ही वह अनेक अध्यापकों से संपर्क स्थापित कर उनके विद्यालयों में जाती है और व्यवस्थापकों से इसका कारण पूछकर धाँधली की पूरी सूचना शिक्षा विभाग के निदेशक को देती है। अध्यापकों के हक को मारकर उनका शोषण करनेवालों के खिलाफ एक मुहिम छेड़कर उनको हक की लड़ाई करना सिखाती और हक दिलवाती। विद्यालयों की इस अव्यवस्था में शामिल सभी लोगों की धज्जियाँ उड़ा देती। संघर्ष उसका स्वभाव है। अतः वह पीछे नहीं हटती।

प्रश्न. 4. ‘रजनी’ पटकथा पढ़कर आपको क्या संदेश मिलता है?

उत्तर: इस पाठ से हमें सदा-सर्वदा अन्याय और झूठ का विरोध करने की प्रेरणा मिलती है। यदि हम अन्याय को सहन करते रहेंगे तो अन्यायी का हौंसला बढ़ता जाएगा। हमारी तरह और भी बहुत से लोगों को उसका अन्याय सहना पड़ेगा। कोई भी कदम उठाने से पहले सही-गलत का निर्णय अवश्य कर लेना चाहिए। गलत बात के लिए अध्यापक, प्रधानाचार्य, शिक्षा निदेशक आदि किसी का भी विरोध करना पड़े, करना ही चाहिए। पाठ पढ़कर लगता है जैसे कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध करने की प्रेरणा दी थी वैसे ही हमें रजनी से संघर्ष करने की शिक्षा मिलती है।

प्रश्न. 5. अमित की उदासी का कारण बताइए।

उत्तर: अमित एक होनहार छात्र था। अद्र्ध वार्षिक परीक्षा तक उसे गणित में 96 प्रतिशत अंक मिले थे। वार्षिक परीक्षा में उसका पेपर बहुत अच्छा हुआ था। उसे पूरी उम्मीद थी कि 95 प्रतिशत से कम नहीं मिल सकते पर उसे 72 प्रतिशत अंक मिले थे। उसके मैथ्स टीचर ने उससे अनेक बार ट्यूशन रखने की बात कही थी, पर उसे इसकी आवश्यकता महसूस न हुई लेकिन आज परिणाम देखकर अमित बेहद दुखी और परेशान था। उसकी मेहनत किसी काम न आ सकी थी इसलिए वह उदास था।

प्रश्न. 6. ‘रजनी समस्या के सभी पहलुओं पर विचार करती है।’-कथन के समर्थन में तर्क दीजिए।

उत्तर: यह कथन पूर्णतः सत्य है-अमित के परीक्षा परिणाम और समस्या का ज्ञान होने पर रजनी ने अमित से अच्छी तरह पूछताछ की थी। उसने पूछा कितने सवाल सही थे? दोस्तों से पूछकर तो सही उत्तर नहीं बताए थे? पिछली सभी परीक्षाओं में तुम्हें कितने अंक मिले थे? आदि प्रश्नों के उत्तर जानकर उसने यह निश्चित किया कि अमित की समस्या वास्तव में सत्य है। उसने तभी आगे संघर्ष किया। संघर्ष के दौरान उसने अध्यापकों को कम वेतन मिलना भी इस समस्या का एक कारण जानकर उस पर भी विचार किया। अत: यह स्पष्ट है कि रजनी हर समस्या के सभी पहलुओं पर विचार करती है।

प्रश्न. 7. ट्यूशन रैकेट को रोकने के लिए रजनी क्या करती है?

उत्तर: रजनी ने जैसे ही अमित से उसके परीक्षा परिणाम से असंतोष के कारण को जाना वह अगले ही दिन उसके विद्यालय के प्रधानाचार्य से मिली। वहाँ उसे संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो वह शिक्षा निदेशक के कार्यालय पहुँची और ट्यूशन रैकेट को पर्दाफ़ाश किया, किंतु आश्चर्य की बात है कि वहाँ पर भी उसे निराशा ही हाथ लगी। रजनी फिर भी हारी नहीं, उसने व्यक्ति स्तर पर अन्य छात्रों के माता-पिता से संपर्क किया और समाचार-पत्र के संपादक से मिलकर आंदोलन का रूप ले चुके अपने इस कार्य को विज्ञापन के माध्यम से प्रसारित किया। उसने एक विशाल सभा का आयोजन कर सबको जगाया।

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 अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न 


 1 

हाँ! कॉपी लौटाते हुए कहा था कि तुमने किया तो अच्छा है पर यह तो हाफ़-ईयरली है.बहुत आसान पेपर होता है इसका तो। अब अगर ईयरली में भी पूरे नंबर लेने हैं तो तुरंत ट्यूशन लेना शुरू कर दो। वरना रह जाओगे। सात लड़कों ने तो शुरू भी कर दिया था। पर मैंने जब मम्मी-पापा से कहा, हमेशा बस एक ही जवाब (मम्मी की नकल उतारते हुए) मैथ्स में तो तू वैसे ही बहुत अच्छा है, क्या करेगा ट्यूशन लेकर? देख लिया अब? सिक्स्थ पोज़ीशन आई है मेरी। जो आज तक कभी नहीं आई थी। 


प्रश्न: 1 अमित के अध्यापक ने उस क्या कहा? क्यों?
उत्तर: अमित के अध्यापक ने उसे कहा कि हाफ़-ईयरली परीक्षा में तुमने अच्छा किया है, परंतु अगर ईयरली में तुम्हें पूरे नंबर लेने हैं तो तुरंत ट्यूशन लगवा लो। उसने ट्यूशन न लेने पर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। वह ऐसा इसलिए कह रहे थे ताकि अमित भी उनके पास ट्यूशन पढ़ने आ जाए।

प्रश्न:2  अमित की मम्मी ने गणित का ट्यूशन लगाने से क्यों मना किया?
उत्तर: अमित गणित में बहुत होशियार है। इस कारण उसकी मम्मी ने गणित का ट्यूशन लगाने से मना कर दिया। इसके अलावा उन्हें अमित की प्रतिभा पर भी भरोसा था।

प्रश्न:3  अमित इस स्थिति में किसे दोषी मानता है? उसकी यह सोच कितनी उचित है?
उत्तर: अमित गणित में कम अंक आने की वजह ट्यूशन न लगाना मानता है। वह अपने माता-पिता को इसके लिए दोषी मानता है। उसकी यह सोच तनिक भी उचित नहीं है, क्योंकि इसके लिए माँ-बाप को दोष देना उचित नहीं है।



 2 

कुछ नहीं कर सकते आप? तो मेहरबानी करके यह कुर्सी छोड़ दीजिए। क्योंकि यहाँ पर कुछ कर सकने वाला आदमी चाहिए। जो ट्यूशन के नाम पर चलने वाली धाँधलियों को रोक सके. मासूम और बेगुनाह बच्चों को ऐसे टीचर्स के शिकंजों से बचा सके जो ट्यूशन न लेने पर बच्चों के नंबर काट लेते हैं. और आप हैं कि कॉपियाँ न दिखाने के नियम से उनके सारे गुनाह ढक देते हैं।


प्रश्न: 1 वक्ता का यह कथन ‘कुछ कर सकने. ‘ कहाँ तक उचित हैं?
उत्तर: वक्ता का कथन पूर्णतया सत्य और उचित है, क्योंकि प्रधानाचार्य का पद जिम्मेदारी का पद है। जो उस पद की जिम्मेदारी नहीं ले सकता, उसे पद पर रहने का अधिकार नहीं है।

प्रश्न:2  ट्यूशन के नाम पर क्या हो रहा है?
उत्तर: ट्यूशन के नाम पर बच्चों का शोषण किया जाता है। उन्हें डराया-धमकाया जाता है। जो बच्चे ट्यूशन नहीं पढ़ते, उन्हें कम अंक दिए जाते हैं जैसा अमित के साथ हुआ।

प्रश्न: 3  कॉपियाँ न दिखाने का नियम कहाँ तक उचित है?
उत्तर:  स्कूलों में वार्षिक परीक्षा की कॉपियाँ न दिखलाने का नियम सर्वथा अन्यायपूर्ण है। इस नियम के नाम पर अंकों की गड़बड़ी को ढका जाता है तथा दोषी अध्यापक अपनी मनमानी करके बच्चों का शोषण करते हैं।



 3 

मुझे बाहर करने की ज़रूरत नहीं। बाहर कीजिए उन सब टीचर्स को जिन्होंने आपकी नाक के नीचे ट्यूशन का यह घिनौना रैकेट चला रखा है। (व्यग्य से) पर आप तो कुछ कर नहीं सकते, इसलिए अब मुझे ही कुछ करना होगा और मैं करूंगी, देखिएगा आप। (तमतमाती हुई निकल जाती है) (हैंडमास्टर चपरासी पर ही बिगड़ पड़ता है) जाने किस-किस को भेज देते हो भीतर। 


प्रश्न: 1 वक्ता क्या करने की बात कहती हैं?
उत्तर: वक्ता ने हैडमास्टर को कहा कि आपको उन सभी टीचर्स को बाहर करना चाहिए जिन्होंने ट्यूशन का घिनौना रैकेट चला रखा है। वे बच्चों का शोषण कर रहे हैं तथा उनका भविष्य खराब कर रहे हैं।

प्रश्न:2  वक्ता क्या धमकी देती हैं?
उत्तर: वक्ता हैडमास्टर को धमकी देती है कि आपने तो ट्यूशन करने वाले अध्यापकों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। अब मुझे ही इस गलत काम को रोकने के लिए कार्रवाई करनी होगी

प्रश्न:3  प्रधानाचार्य किस पर बिगड़ा और क्या कहा तथा क्यों?
उत्तर: प्रधानाचार्य चपरासी पर क्रोधित होता है। वह कहता है कि तुम किस तरह के लोगों को अंदर भेज देते हो। उसने ऐसा इसलिए कहा ताकि वक्ता का गुस्सा उस निरीह चपरासी पर उतार सके।




 4 

देखो, तुम मुझे फिर गुस्सा दिला रहे हो रवि. गलती करने वाला तो है ही गुनहगार, पर उसे बर्दाश्त करने वाला भी कम गुनहगार नहीं होता जैसे लीला बेन और कांति भाई और हज़ारों-हज़ारों माँ-बाप। लेकिन सबसे बड़ा गुनहगार तो वह है जो चारों तरफ अन्याय, अत्याचार और तरह-तरह की धाँधलियों को देखकर भी चुप बैठा रहता है, जैसे तुम। (नकल उतारते हुए) हमें क्या करना है, हमने कोई ठेका ले रखा है दुनिया का। (गुस्से और हिकारत से) माई फुट (उठकर भीतर जाने लगती हैं। जाते-जाते मुड़कर) तुम जैसे लोगों के कारण ही तो इस देश में कुछ नहीं होता, हो भी नहीं सकता! (भीतर चली जाती है।) 

प्रश्न:1 गलती सहने वाला गुनहगार कैसे होता है?
उत्तर: गलती सहने वाला गुनहगार होता है, क्योंकि इससे अन्याय करने वाले को साहस मिलता है। वह अपने काम को सही मानकर और अधिक अत्याचार करने लगता है।

प्रश्न:2 यहाँ किस-किसे गुनहगार कहा गया है तथा क्यों?
उत्तर: यहाँ दो प्रकार के लोगों को गुनहगार माना गया है-
(क) गुनाह करने वाले।
(ख) गुनाह को सहने वाले।
ये दोनों ही गुनहगार हैं। गुनाहगार गलती करता है तथा उसे सहने वाला उसे बढ़ावा देता है।

प्रश्न: 3 वक्ता के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: वक्ता समाजसेविका है। वह किसी के ऊपर हो रहे अत्याचार को सहन नहीं करती। वह अपने पति तक को दोषी मानती है। वह स्पष्ट वक्ताँ है।



 5 

निदेशक : वैरी सैड! हैडमास्टर को एक्शन लेना चाहिए। ऐसे टीचर के खिलाफ।
रजनी : क्या खूब! आप कहते हैं कि हैडमास्टर को एक्शन लेना चाहिए… हैडमास्टर कहते हैं मैं कुछ नहीं कर सकता, तब करेगा कौन? मैं पूछती हूँ कि ट्यूशन के नाम पर चलने वाले इस घिनौने रैकेट को तोड़ने के लिए दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए आपको, आपके बोर्ड को? (चहरा तमतमा जाता हैं)
निदेशक : लेकिन हमारे पास तो आज तक किसी पेरेंट से इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई।
रजनी : यानी की शिकायत आने पर ही आप इस बारे में कुछ सोच सकते हैं। वैसे शिक्षा के नाम पर दिन-दहाड़े चलने वाली इस दुकानदारी की आपके (बहुत ही व्यग्यात्मक ढंग से) बोर्ड ऑफ एजुकेशन को कोई जानकारी ही नहीं, कोई चिंता ही नहीं?


प्रश्न: 1 रजनी निदेशक के पास क्यों गई?
उत्तर: रजनी ट्यूशन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करवाना चाहती है। वह जानना चाहती है कि शिक्षा बोर्ड के पास स्कूलों पर नियंत्रण के अधिकार हैं या नहीं।

प्रश्न: 2 ‘क्या खूब ‘ में निहित व्यग्य स्पष्ट करें।
उत्तर: इस में शिक्षा-व्यवस्था पर करारा व्यंग्य है। अध्यापक ट्यूशन के नाम पर बच्चों का शोषण करते हैं, हैडमास्टर उनके खिलाफ एक्शन नहीं लेते तथा अधिकारी हैडमास्टर को जिम्मेदारी सिखाते हैं या लिखित शिकायत चाहते हैं। हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी से भागना चाहता है।

प्रश्न: 3 शिक्षा बोड की कार्यशैली पर टिप्पणी करें।
उत्तर: शिक्षा बोर्ड भी अन्य सरकारी विभागों की तरह अकर्मण्यशील है। वह शिकायत पर ही कोई कार्रवाई करता है अन्यथा उसे किसी बात की कोई जानकारी नहीं होती। वे स्कूलों में हो रहे शोषण से अवगत तो रहते हैं पर उसके खिलाफ कुछ नहीं करते।



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(एकाएक जोश में आकर) आप भी महसूस करते हैं न ऐसा?. तो फिर साथ दीजिए हमारा। अखबार यदि किसी इश्यू को उठा ले और लगातार उस पर चोट करता रहे तो फिर वह थोड़े से लोगों की बात नहीं रह जाती। सबकी बन जाती है. आँख मूँदकर नहीं रह सकता फिर कोई उससे। आप सोचिए ज़रा अगर इसके खिलाफ कोई नियम बनता है तो (आवेश के मारे जैसे बोला नहीं जा रहा है) कितने पेरेंट्स को राहत मिलेगी. कितने बच्चों का भविष्य सुधर जाएगा, उन्हें अपनी मेहनत का फल मिलेगा, माँ-बाप के पैसे का नहीं. शिक्षा के नाम पर बचपन से ही उनके दिमाग में यह तो नहीं भरेगा कि पैसा ही सब कुछ है.


प्रश्न:1 वक्ता किससे कब बात कर रहा है?
उत्तर: वक्ता यानी रजनी अखबार के कार्यालय में संपादक से ट्यूशन के विषय में बात कर रही है। वह उन्हें ट्यूशन के कुप्रभावों के बारे में महसूस कराती है तथा उनसे समर्थन माँगती है।

प्रश्न:2 अखबार किसी बात को व्यापक कैसे बना देता हैं?
उत्तर: जब अखबार किसी बात को उठाता है तो उसका प्रचार-प्रसार पूरे समाज में हो जाता है। सभी लोग उस मुद्दे पर अपना विचार प्रस्तुत करते हैं साथ ही इससे जनमत तैयार होता है। फलस्वरूप अन्याय या शोषण के खिलाफ लोग खड़े हो जाते हैं।

प्रश्न:3 रजनी संपादक को ट्यूशन रोकने के क्या-क्या लाभ गिनाती हैं?
उत्तर: संपादक को ट्यूशन रोकने के निम्नलिखित लाभ गिनवाए गए-
(क) इससे प्रभावित अनगिनत बच्चों व उनके माता-पिताओं को ट्यूशन की समस्या से राहत मिलेगी।
(ख) बच्चों का भविष्य सुधर जाएगा।
(ग) उन्हें अपनी मेहनत का फल मिलेगा।
(घ) वे शिक्षा को बड़ा मानेंगे न कि पैसे को।




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(रुककर) बड़ा अच्छा लगा जब टीचर्स की ओर से भी एक प्रतिनिधि ने आकर बताया कि कई प्राइवेट स्कूलों में तो उन्हें इतनी कम तनख्वाह मिलती है कि ट्यूशन न करें तो उनका गुज़ारा ही न हो। कई जगह तो ऐसा भी है कि कम तनख्वाह देकर ज्यादा पर दस्तखत करवाए जाते हैं। ऐसे टीचर्स से मेरा अनुरोध है कि वे संगठित होकर एक आंदोलन चलाएँ और इस अन्याय का पर्दाफाश करें (हॉल में बैठा हुआ पति धीरे से फुसफुसाता है, लो, अब एक और आदोलन का मसाला मिल गया, कैमरा फिर रजनी पर) इसलिए अब हम अपनी समस्या से जुड़ी सारी बातों को नज़र में रखते हुए ही बोंड के सामने यह प्रस्ताव रखेंगे कि वह ऐसा नियम बनाए (एक-एक शब्द पर जोर देते हुए) कि कोई भी टीचर अपने ही स्कूल के छात्रों का ट्यूशन नहीं करेगा।
(रुककर) ऐसी स्थिति में बच्चों के साथ ज़ोर-ज़बरदस्ती करने, उनके नंबर काटने की गंदी हरकतें अपने आप बंद हो जाएँगी। साथ ही यह भी हो कि इस नियम को तोड़ने वाले टीचर्स के खिलाफ सख्त-से-सख्त कार्यवाही की जाएगी..। 


प्रश्न:1 प्राइवेट स्कूल के अध्यापकों की कौन-कौन-सी समस्याएँ सामने आई?
उत्तर: प्राइवेट स्कूल के अध्यापकों की मुख्य रूप से दो समस्याएँ सामने आईं-
(क) अध्यापकों को बेहद कम तनख्वाह मिलती है। इस कारण गुज़ारा करने के लिए उन्हें ट्यूशन करना पड़ता है।
(ख) कई जगह उन्हें अधिक वेतन पर हस्ताक्षर करने पड़ते हैं तथा वेतन कम दिया जाता है।

प्रश्न:2 वक्ता ने प्राइवेट स्कूल के अध्यापकों की समस्या का क्या समाधान बताया?
उत्तर: वक्ता रजनी है। उसने प्राइवेट स्कूलों के अध्यापकों को कहा कि वे संगठित होकर आंदोलन चलाएँ और कम वेतन की धाँधलेबाजी का पर्दाफाश करें।

प्रश्न: 3 ट्यूशन के बारे में सभा में कौन-सा प्रस्ताव रखा गया?
उत्तर: ट्यूशन के बारे में सभा में एक प्रस्ताव रखा गया कि बोर्ड यह नियम बनाए कि कोई भी टीचर अपने ही स्कूल के छात्रों को ट्यूशन नहीं करेगा। यदि वह ऐसा करे तो उस टीचर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


 लेखिका परिचय 

जीवन परिचय

मन्नू भंडारी का जन्म 1931 ई. में मध्यप्रदेश के भानपुरा में हुआ। इनकी आरंभिक शिक्षा अजमेर में हुई। इन्होंने एम.ए. (हिंदी) की परीक्षा काशी हिंदू विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की। इन्होंने कोलकाता तथा दिल्ली के मिरांडा हाऊस में बतौर प्राध्यापिका के पद पर कार्य किया। इनकी साहित्यिक उपलब्धियों को देखते हुए इन्हें कई संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत किया गया। इन्हें हिंदी अकादमी, दिल्ली के शिखर सम्मान, बिहार सरकार, कोलकाता की भारतीय भाषा परिषद्, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी और उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा सम्मानित किया गया।

रचनाएँ

इनकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं—
कहानी-संग्रह-एक प्लेट सैलाब, मैं हार गई, तीन निगाहों की एक तस्वीर, यही सच है, त्रिशंकु, आँखों देखा झूठ।
उपन्यास-आपका बंटी, महाभोज, स्वामी, एक इंच मुस्कान (राजेंद्र यादव के साथ)।
पटकथाएँ-रजनी, निर्मला, स्वामी, दर्पण।

साहित्यिक विशेषताएँ

मन्नू भंडारी हिंदी कहानी में उस समय सक्रिय हुई जब नई कहानी आंदोलन अपने उठान पर था। उनकी कहानियों में कहीं पारिवारिक जीवन, कहीं नारी-जीवन और कहीं समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन की विसंगतियाँ विशेष आत्मीय अंदाज़ में अभिव्यक्त हुई हैं। उन्होंने आक्रोश, व्यंग्य और संवेदना को मनोवैज्ञानिक रचनात्मक आधार दिया है-वह चाहे कहानी हो, उपन्यास हो या फिर पटकथा ही क्यों न हो। उनका मानना है-
‘‘लोकप्रियता कभी भी रचना का मानक नहीं बन सकती। असली मानक तो होता हैं रचनाकार का दायित्वबोध, उसके सरोकार, उसकी जीवन दृष्टि।”



जय हिन्द : जय हिंदी 
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