प्रश्न: 1.‘खानपान की बदलती तसवीर’ नामक पाठ के लेखक के नाम बताएँ।
(i) रामचंद्र शुक्ल
(ii) शिवप्रसाद सिंह
(iii) प्रयाग शुक्ल
(iv) विजय तेंदुलकर।
उत्तर : (iii) प्रयाग शुक्ल
(i) रामचंद्र शुक्ल
(ii) शिवप्रसाद सिंह
(iii) प्रयाग शुक्ल
(iv) विजय तेंदुलकर।
उत्तर : (iii) प्रयाग शुक्ल
प्रश्न: 2. खानपान की संस्कृति में बड़ा बदलाव कब से आया?
(i) पाँच-सात वर्षों में
(ii) आठ-दस वर्षों में
(iii) दस-पंद्रह वर्षों में
(iv) पंद्रह-बीस वर्षों में
उत्तर : (iii) दस-पंद्रह वर्षों में
प्रश्न: 3. युवा पीढ़ी इनमें से किसके बारे में बहुत अधिक जानती है?
(i) स्थानीय व्यंजन
(ii) नए व्यंजन
(iii) खानपान की संस्कृति
(iv) इनमें से कोई नहीं।
प्रश्न: 3. युवा पीढ़ी इनमें से किसके बारे में बहुत अधिक जानती है?
(i) स्थानीय व्यंजन
(ii) नए व्यंजन
(iii) खानपान की संस्कृति
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर : (iii) खानपान की संस्कृति
प्रश्न: 4. ढाबा संस्कृति कहाँ तक फैल चुकी है?
(i) दक्षिण भारत
(ii) उत्तर भारत तक
(iii) पूरे देश में
(iv) कहीं नहीं।
प्रश्न: 4. ढाबा संस्कृति कहाँ तक फैल चुकी है?
(i) दक्षिण भारत
(ii) उत्तर भारत तक
(iii) पूरे देश में
(iv) कहीं नहीं।
उत्तर : (iii) पूरे देश में
प्रश्न: 5. पाव-भाजी किस प्रांत का स्थानीय व्यंजन है?
(i) राजस्थान
(ii) महाराष्ट्र
(iii) गुजरात
(iv) मध्य प्रदेश।
प्रश्न: 5. पाव-भाजी किस प्रांत का स्थानीय व्यंजन है?
(i) राजस्थान
(ii) महाराष्ट्र
(iii) गुजरात
(iv) मध्य प्रदेश।
उत्तर : (ii) महाराष्ट्र
प्रश्न: 6. किसी स्थान का खान-पान भिन्न क्यों होता है?
(i) मौसम के अनुसार, मिलने वाले खाद्य पदार्थ
(ii) रुचि के आधार पर
(iii) आसानी से वस्तुओं की उपलब्धता
(iv) उपर्युक्त सभी
प्रश्न: 6. किसी स्थान का खान-पान भिन्न क्यों होता है?
(i) मौसम के अनुसार, मिलने वाले खाद्य पदार्थ
(ii) रुचि के आधार पर
(iii) आसानी से वस्तुओं की उपलब्धता
(iv) उपर्युक्त सभी
उत्तर : (iv) उपर्युक्त सभी
प्रश्न: 7 .इनमें से किसे फास्ट फूड के नाम से जाना जाता है।
(i) सेव
(ii) रोटी
(iii) दाल
(iv) बर्गर
प्रश्न: 7 .इनमें से किसे फास्ट फूड के नाम से जाना जाता है।
(i) सेव
(ii) रोटी
(iii) दाल
(iv) बर्गर
उत्तर : (iv) बर्गर
पिछले दस-पंद्रह वर्षों से हमारी खानपान की संस्कृति में एक बड़ा बदलाव आया है। इडली-डोसा-बड़ा-साँभर-रसम अब केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं हैं। ये उत्तर भारत के भी हर शहर में उपलब्ध हैं और अब तो उत्तर भारत की ‘ढाबा’ संस्कृति लगभग पूरे देश में फैल चुकी है। अब आप कहीं भी हों, उत्तर भारतीय रोटी-दाल-साग आपको मिल ही जाएँगे। ‘फ़ास्ट फूड’ (तुरंत भोजन) का चलन भी बड़े शहरों में खूब बढ़ा है। इस ‘फ़ास्ट फ़ूड’ में बर्गर, नूडल्स जैसी कई चीजें शामिल हैं। एक ज़माने में कुछ ही लोगों तक सीमित ‘चाइनीज़ नूडल्स’ अब संभवतः किसी के लिए अजनबी नहीं रहें।
प्रश्न: 8.किस बात में बदलाव आया है?
(a) वेशभूषा में
(b) सोचने-विचारने में
(c) खानपान की संस्कृति में
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर : (c) खानपान की संस्कृति में
प्रश्न: 9.खान-पान की संस्कृति में बदलाव कितने वर्षों में आया?
(a) पाँच-सात वर्षों में
(b) दस-पंद्रह वर्षों में
(c) पंद्रह-बीस वर्षों में
(d) बीस-पच्चीस वर्षों में
उत्तर : (b) दस-पंद्रह वर्षों में
प्रश्न: 10.‘ढाबा संस्कृति’ कहाँ तक फैल चुकी है?
(a) पूरे देश में
(b) दक्षिण भारत तक
(c) उत्तर भारत तक
(d) पूरे विश्व में
उत्तर : (a) पूरे देश में
प्रश्न: 11.बड़े शहरों में किसका प्रचलन बढ़ा है?
(a) फ़ास्ट फूड का
(b) साँभर-डोसा का
(c) दाल रोटी का
(d) खान-पान का
उत्तर : (a) फ़ास्ट फूड का
प्रश्न: 12.‘उत्तर भारत की ढाबा’ संस्कृति पर क्या परिणाम हुआ है?
(a) पूरी तरह समाप्त हो गई
(b) पूरे देश में फैल गई है
(c) सीमित जगहों पर ही उपलब्ध है
(d) कोई परिवर्तन नहीं हुआ
उत्तर : (b) पूरे देश में फैल गई है
प्रश्न: 12.‘उत्तर भारत की ढाबा’ संस्कृति पर क्या परिणाम हुआ है?
(a) पूरी तरह समाप्त हो गई
(b) पूरे देश में फैल गई है
(c) सीमित जगहों पर ही उपलब्ध है
(d) कोई परिवर्तन नहीं हुआ
उत्तर : (b) पूरे देश में फैल गई है
प्रश्न: 13.उपरोक्त गद्यांश के पाठ और उसके लेखक का नाम बताइए।
(a) खानपान की बदलती तस्वीर – रामचंद्र शुक्ल
(b) खानपान की बदलती तस्वीर – विजय तेंदुलकर
(c) खानपान की बदलती तस्वीर – प्रयाग शुक्ल
(d) खानपान की बदलती तस्वीर – भवानीप्रसाद मिश्र।
उत्तर : (c) खानपान की बदलती तस्वीर – प्रयाग शुक्ल
स्थानीय व्यंजन भी तो अब घटकर कुछ ही चीज़ों तक सीमित रह गए हैं। बंबई की पाव-भाजी और दिल्ली के छोले-कुलचों की दुनिया पहले की तुलना में बढ़ी ज़रूर है, पर अन्य स्थानीय व्यंजनों की दुनिया में छोटी हुई है। जानकार ये भी बताते हैं कि मथुरा के पेड़ों और आगरा के पेठे-नमकीन में अब वह बात कहाँ रही! यानी जो चीजें बची भी हुई हैं, उनकी गुणवत्ता में फ़र्क पड़ा है। फिर मौसम और ऋतुओं के अनुसार फलों-खाद्यान्नों से जो व्यंजन और पकवान बना करते थे, उन्हें बनाने की फुरसत भी अब कितने लोगों को रह गई है। अब गृहिणियों या कामकाजी महिलाओं के लिए खरबूजे के बीज सुखाना-छीलना और फिर उनसे व्यंजन तैयार करना सचमुच दुस्साध्य है?
प्रश्न: 14.नई पीढ़ी को स्थानीय व्यंजनों का किस प्रकार का ज्ञान प्राप्त था?
(a) रुचि के साथ खाने का
(b) उन्हें गहराई तक जानती समझती है
(c) बहुत कम जानकारी है
(d) जानने की जिज्ञासा नहीं है।
उत्तर : (c) बहुत कम जानकारी है
प्रश्न: 15.खानपान की बदलती संस्कृति ने किसे अधिक प्रभावित किया।
(a) सभी को
(b) पुरानी पीढ़ी को
(c) किसी को नहीं
(d) नई पीढ़ी को।
उत्तर : (d) नई पीढ़ी को।
प्रश्न: 16.युवा पीढ़ी इनमें से किसके बारे में अधिक जानती है?
(a) स्थानीय व्यंजन को
(b) नए व्यंजनों को
(c) खानपान की संस्कृति के बारे में
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर : (c) खानपान की संस्कृति के बारे में
प्रश्न: 17.मुंबई की क्या चीज़ लोकप्रिय खान-पान में है?
(a) छोले-भठूरे
(b) दाल-रोटी
(c) इडली-डोसा
(d) पाव भाजी।
उत्तर : (d) पाव भाजी।
(a) छोले-भठूरे
(b) दाल-रोटी
(c) इडली-डोसा
(d) पाव भाजी।
उत्तर : (d) पाव भाजी।
प्रश्न: 18.खानपान की चीजों की किस बात में अंतर आया है?
(a) गुणवत्ता में
(b) स्वाद में
(c) दोनों में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर : (c) दोनों में
प्रश्न: 19.भारतीय शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय इनमें से कौन-सा है?
(a) य
(b) तीय
(c) इय
(d) ईय
उत्तर : (d) ईय
हम खानपान से भी एक-दूसरे को जानते हैं। इस दृष्टि से देखें तो खानपान की नई संस्कृति में हमें राष्ट्रीय एकता के लिए नए बीज भी मिल सकते हैं। बीज भलीभाँति अंकुरित होंगे जब हम खानपान से जुड़ी हुई दूसरी चीजों की ओर भी ध्यान देंगे। मसलन हम उस बोली-बानी, भाषा-भूषा आदि को भी किसी-न-किसी रूप में ज्यादा जानेंगे, जो किसी खानपान-विशेष से जुड़ी हुई है। इसी के साथ ध्यान देने की बात यह है कि ‘स्थानीय’ व्यंजनों का पुनरुद्धार भी ज़रूरी है जिन्हें अब ‘एथनिक’ कहकर पुकारने का चलन है। ऐसे स्थानीय व्यंजन केवल पाँच सितारा होटलों के प्रचारार्थ नहीं छोड़ दिए जाने चाहिए। पाँच सितारा होटलों में वे कभीकभार मिलते रहें, पर घरों-बाज़ारों से गायब हो जाएँ तो यह एक दुर्भाग्य ही होगा। अच्छी तरह बनाई-पकाई गई पूड़ियाँ-कचौड़ियाँजलेबियाँ भी अब बाज़ारों से गायब हो रही हैं। मौसमी सब्जियों से भरे हुए समोसे भी अब कहाँ मिलते हैं ? उत्तर भारत में उपलब्ध व्यंजनों की भी दुर्गति हो रही है?
प्रश्न: 20.खानपान की नई संस्कृति का सबसे अधिक प्रभाव किस पर पड़ता है?
(a) सांस्कृतिक एकजुटता पर
(b) राष्ट्रीय एकता पर
(c) खानपान का नया स्वरूप
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर : (b) राष्ट्रीय एकता पर
प्रश्न: 21.खानपान के अलावे किन चीज़ों का अनुसरण किया जाता है?
(a) भाषा और बोली
(b) वेशभूषा
(c) रहन-सहन
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर : (d) उपर्युक्त सभी।
प्रश्न: 22.किसका पुनरुद्धार जरूरी है?
(a) स्थानीय व्यंजनों का
(b) नए व्यंजनों
(c) एथनिक
(d) किसी का नहीं।
उत्तर : (a) स्थानीय व्यंजनों का
प्रश्न: 23.‘बोली और भाषा’ राष्ट्रीय एकता को कैसे प्रभावित करते हैं-
(a) सभी लोग एक-दूसरे की भाषा जान जाते हैं
(b) एक-दूसरे प्रांत के लोग भावों और विचारों को समझने लगते हैं
(c) एक दूसरे की जान पहचान बढ़ जाती है
(d) एक प्रांत से दूसरे प्रांत में जा सकते हैं।
उत्तर : (b) एक-दूसरे प्रांत के लोग भावों और विचारों को समझने लगते हैं
प्रश्न: 24.मौसमी सब्जियाँ-रेखांकित शब्द क्या हैं ?
(a) संज्ञा
(b) सर्वनाम
(c) विशेषण
(d) क्रिया
उत्तर : (c) विशेषण
खानपान की मिश्रित संस्कृति में हम कई बार चीज़ों का असली और अलग स्वाद नहीं ले पा रहे। अकसर प्रीतिभोजों और पार्टियों में एक साथ ढेरों चीजें रख दी जाती हैं और उनका स्वाद गड्डमड्ड होता रहता है। खानपान की मिश्रित या विविध संस्कृति हमें कुछ चीजें चुनने का अवसर देती हैं, हम उसका लाभ प्रायः नहीं उठा रहे हैं। हम अकसर एक ही प्लेट में कई तरह के और कई बार तो बिलकुल विपरीत प्रकृतिवाले व्यंजन परोस लेना चाहते हैं।
प्रश्न: 25.उपरोक्त गद्यांश के पाठ का नाम इनमें से कौन-सा है?
(a) खानपान की बदलती संस्कृति
(b) खानपान की नई संस्कृति
(c) खानपान की बदलती तस्वीर
(d) खानपान की तस्वीर।
उत्तर : (c) खानपान की बदलती तस्वीर
(c) खानपान की बदलती तस्वीर
(d) खानपान की तस्वीर।
उत्तर : (c) खानपान की बदलती तस्वीर
प्रश्न: 26.खानपान की मिश्रित संस्कृति का प्रभाव क्या पड़ता है?
(a) व्यंजनों का उपलब्ध न होना
(b) व्यंजनों का असली स्वाद न ले पाना
(c) स्थानीय व्यंजनों का महत्त्व बढ जाना
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर : (b) व्यंजनों का असली स्वाद न ले पाना
प्रश्न: 27.खानपान की मिश्रित संस्कृति ने हमें किसका मौका दिया है?
(a) अलग स्वाद लेने का
(b) दूर दराज़ जगहों के व्यंजनों की जानकारी का
(c) नए-नए व्यंजन चुनने का
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर : (c) नए-नए व्यंजन चुनने का
प्रश्न: 28.प्रीति भोजों और पार्टियों में एक साथ ढेरों चीजें एक साथ रख देने से क्या होता है?
(a) स्वाद परस्पर मिल जाता है
(b) चयन करने का मौका मिलता है
(c) खानेवालों का समय बच जाता है
(d) स्वाद बढ़ जाता है।
उत्तर : (a) स्वाद परस्पर मिल जाता है
प्रश्न: 29.प्रकृतिवाले में कौन सा ‘प्रत्यय’ है-
(a) ले
(b) वाले
(c) प्र
(d) ति
उत्तर : (b) वाल
बंबई की पाव-भाजी और दिल्ली के छोले-कुलचों की दुनिया पहले की तुलना में बड़ी ज़रूर है, पर अन्य स्थानीय व्यंजनों की दुनिया में छोटी हुई है। जानकार ये भी बताते हैं कि मथुरा के पेड़ों और आगरा के पेठे-नमकीन में अब वह बात कहाँ रही! यानी जो चीजें बची भी हुई हैं, उनकी गुणवत्ता में फ़र्क पड़ा है। फिर मौसम और ऋतुओं के अनुसार फलों-खाद्यान्नों से जो व्यंजन और पकवान बना करते थे, उन्हें बनाने की फुरसत भी अब कितने लोगों को रह गई है। अब गृहिणियों या कामकाजी महिलाओं के लिए खरबूज़ के बीच सुखाना-छीलना और फिर उनसे व्यंजन तैयार करना सचमुच दुस्साध्य है?
प्रश्न: 30.वस्तुओं की गुणवत्ता में क्या और कैसे फ़र्क आया है?
उत्तर :
प्रश्न: 31.आज की गृहिणियों और कामकाजी महिलाओं के लिए क्या दुस्साध्य है?
उत्तर :
प्रश्न: 32.मौसमी फलों और खाद्यानों से बनाए जाने वाले कई व्यंजन अब नहीं बनाए जाते हैं, क्यों?
उत्तर :
प्रश्न: 33.स्थानीय व्यंजनों की दुनिया सीमित होती जा रही है? इसके क्या कारण हैं ?
उत्तर :
प्रश्न: 34.इस गद्यांश के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहते हैं और क्यों?
उत्तर :
हम खान-पान से भी एक-दूसरे को जानते हैं। इस दृष्टि से देखें तो खानपान की नई संस्कृति में हमें राष्ट्रीय एकता के लिए नए बीज भी मिल सकते हैं। बीज भलीभाँति तभी अंकुरित होंगे जब हम खानपान से जुड़ी हुई दूसरी चीज़ों की ओर भी ध्यान देंगे। मसलन हम उस बोली-बानी, भाषा-भूषा आदि को भी किसी-न-किसी रूप में ज्यादा जानेंगे, जो किसी खानपान-विशेष से जुड़ी हुई है। इसी के साथ ध्यान देने की बात यह है कि ‘स्थानीय’ व्यंजनों का पुनरुद्धार भी ज़रूरी है जिन्हें अब ‘एथनिक’ कहकर पुकारने का चलन बहुत है। ऐसे स्थानीय व्यंजन केवल पाँच सितारा होटलों के प्रचारार्थ नहीं छोड़ दिए जाने चाहिए। पाँच सितारा होटलों में वे कभी-कभार मिलते रहें, पर घरों-बाज़ारों से गायब हो जाएँ तो यह एक दुर्भाग्य ही होगा। अच्छी तरह बनाई-पकाई गई पूड़ियाँकचौड़ियाँ-जलेबियाँ भी अब बाज़ारों से गायब हो रही हैं। मौसमी सब्जियों से भरे हुए समोसे भी अब कहाँ मिलते हैं ? उत्तर भारत में उपलब्ध व्यंजनों की भी दुर्गति हो रही है?
प्रश्न: 35.खानपान की नई संस्कृति का क्या लाभ है ?
उत्तर :
प्रश्न: 36.स्थानीय व्यंजनों को क्या कहकर पुकारा जाने लगा है? और क्यों?
उत्तर :
उत्तर :
प्रश्न: 37.स्थानीय व्यंजनों का पुनरुद्धार क्यों ज़रूरी है?
उत्तर :
प्रश्न: 38.स्थानीय व्यंजनों के उद्धार के लिए क्या-क्या प्रयास किया जाना चाहिए?
उत्तर :
प्रश्न: 39.किन चीज़ों को होटलों पर नहीं छोड देना चाहिए?
उत्तर :
प्रश्न: 40.उत्तर भारत के व्यंजनों की दुर्गति हो रही है- लेखक ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर :
यह भी एक कड़वा सच है कि कई स्थानीय व्यंजनों को हमने तथाकथित आधुनिकता के चलते छोड़ दिया है और पश्चिम की नकल में बहुत-सी ऐसी चीजें अपना ली हैं, जो स्वाद, स्वास्थ्य और सरसता के मामले में हमारे बहुत अनुकूल नहीं हैं।
हो यह भी रहा है कि खानपान की मिश्रित संस्कृति में हम कई बार चीज़ों का असली और अलग स्वाद नहीं ले पा रहे। अकसर प्रीतिभोजों और पार्टियों में एक साथ ढेरों चीजें रख दी जाती हैं और उनका स्वाद गड्डमड्ड होता रहता है। खानपान की मिश्रित या विविध संस्कृति हमें कुछ चीजें चुनने का अवसर देती है, हम उसका लाभ प्रायः नहीं उठा रहे हैं। हम अकसर एक ही प्लेट में कई तरह के और कई बार तो बिलकुल विपरीत प्रकृतिवाले व्यंजन परोस लेना चाहते हैं।
प्रश्न: 41.कड़वा सच क्या है?
उत्तर :
प्रश्न: 42.स्थानीय व्यंजन कई कारणों से छोड़े जा रहे हैं, परंतु सबसे दुखद क्या है ?
उत्तर :
प्रश्न: 43.क्या खानपान में पश्चिम की नकल सही हैं?
उत्तर :
उत्तर :
प्रश्न: 44.खानपान की मिश्रित संस्कृति के हम कई बार चीज़ों का असली स्वाद क्यों नहीं ले पाते?
उत्तर :
प्रश्न: 45.‘सरसता’ और ‘अनुकूल’ का विलोम लिखिए।
उत्तर :
प्रश्न: 46.उपरोक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर :
जय हिन्द : जय हिंदी
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